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गोरखपुर

शब्दों की अमृतधारा में सराबोर हुआ पुस्तक विमोचन समारोह

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गोरखपुर में साहित्य और संवेदना का भव्य संगम

गोरखपुर। साहित्य, संवेदना और संस्कारों के अद्भुत संगम का साक्षी बना गोरखपुर का एक भव्य समारोह, जहां कवि, लेखक, अधिवक्ता, पूर्व शिक्षक एवं साहित्यकार संतोष सिंह ‘अकेला’ की चर्चित कृति “कुछ तुम्हारी कुछ हमारी” का विमोचन बड़े हर्षोल्लास और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।

आयोजन और अतिथियों का भव्य स्वागत

कार्यक्रम का आयोजन शिव कुमार निषाद एडवोकेट, उपाध्यक्ष बार एसोसिएशन सिविल कोर्ट गोरखपुर के नेतृत्व में किया गया। समारोह में उपस्थित मुख्य अतिथियों एवं विशिष्ट अतिथियों का माल्यार्पण कर भव्य स्वागत किया गया, जिससे कार्यक्रम की गरिमा और बढ़ गई।

पुस्तक का संदेश और भावार्थ

पुस्तक “कुछ तुम्हारी कुछ हमारी” को संवाद, संवेदना और साझा अनुभवों का प्रतीक बताया गया। वक्ताओं ने इसे केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि जीवन के विविध रंगों, रिश्तों की गहराइयों और समाज की सच्चाइयों का दर्पण बताया।

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साहित्यिक विचारों का जीवंत मंच

समारोह में विद्वानों, साहित्यकारों, अधिवक्ताओं और बुद्धिजीवियों का संगम देखने को मिला। वक्ताओं के विचारों ने साहित्यिक वातावरण को और भी प्रभावशाली बना दिया।

वक्ताओं ने कहा कि शब्दों में समाज को बदलने की शक्ति होती है। जब शब्द संवेदनाओं से जुड़ते हैं तो कविता बनते हैं, और जब विचारों से जुड़ते हैं तो दर्शन का रूप लेते हैं।

लेखक की सराहना

संतोष सिंह ‘अकेला’ के साहित्यिक योगदान की सराहना करते हुए वक्ताओं ने कहा कि उन्होंने समाज, संस्कृति और मानवीय मूल्यों को सहज भाषा में प्रस्तुत करने का सराहनीय कार्य किया है। उनकी यह कृति पाठकों को आत्ममंथन और नई दृष्टि प्रदान करेगी।

साहित्यिक उत्सव का समापन

समारोह के अंत में साहित्य प्रेमियों ने पुस्तक की सफलता की कामना की। उन्होंने कहा कि ऐसी रचनाएं समाज में सकारात्मक चिंतन को बढ़ावा देती हैं और नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

यह आयोजन केवल एक पुस्तक का विमोचन नहीं था, बल्कि शब्दों के सम्मान, साहित्य की साधना और विचारों की जीवंत अभिव्यक्ति का एक अविस्मरणीय उत्सव बन गया।

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