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वाराणसी

राज्यमीन चिताला के रिवर रैचिंग से प्राकृतिक जल स्रोतों में इसकी संख्या में बढ़ोत्तरी होगी- परशोत्तम रूपाला

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जलीय पारिस्थिति की संतुलन बनाने में सहायता मिलेगी, साथ ही मत्स्य पालकों की आय में वृद्धि होगी-मंत्री मत्स्य, पशुधन एवं दुग्ध विकास, भारत सरकार

मत्स्य महापुराण 18 पुराणों में अपना विशिष्ट स्थान रखता है-संजय निषाद

प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजनान्तर्गत अब तक रू0 1000/- करोड़ से अधिक की परियोजनायें उ0 प्र0 में निर्माणाधीन अथवा क्रियाशील है-मत्स्य मंत्री, उ0प्र0

मुख्यमंत्री मत्स्य सम्पदा योजनान्तर्गत किसानों की आय में वृद्धि एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश में संचालित है

ग्राम सभा एवं अन्य पट्टे के तालाबों में निवेश एवं मत्स्य बीज बैंक की स्थापना हेतु राज्य सरकार द्वारा दो परियोजनायें संचालित की जा रही है

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वाराणसी में राज्यमीन चिताला की 1.00 लाख मत्स्य बीज रिवर रैंचिंग का कार्यक्रम सम्पन्न

    वाराणसी। सन्त रविदास घाट पर मंगलवार को राज्यमीन चिताला की 1.00 लाख मत्स्य बीज रिवर रैंचिंग का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। मुख्य अतिथि परशोत्तम रूपाला, मंत्री मत्स्य, पशुधन एवं दुग्ध विकास, भारत सरकार ने लोगो को संबोधित करते हुए कहा कि राज्यमीन चिताला के रिवर रैचिंग से प्राकृतिक जल स्रोतों में इसकी संख्या में बढ़ोत्तरी होगी, इससे जलीय पारिस्थिति की संतुलन बनाने में सहायता मिलेगी, साथ ही मत्स्य पालकों की आय में वृद्धि होगी एवं जन सामान्य को प्रोटीन युक्त पौस्टिक आहार की उपलब्धता में विद्ध होगी।  
   कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ संजय कुमार निषाद, मत्स्य मंत्री, उ0प्र0 ने कहा कि मत्स्य महापुराण 18 पुराणों में अपना विशिष्ट स्थान रखता है। भगवान विष्णु के मत्स्यावतार से सम्बन्ध होने के कारण यह मत्स्य पुराण कहलाता है। भगवान् मत्स्य के द्वारा राजा वैवस्वत मनु तथा सप्तर्षियों को जो अत्यन्त दिब्य एव कल्याणकारी उपदेश दिये गये थे, वे ही मत्स्य पुराण में संगृहीत हैं। प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजनान्तर्गत अब तक रू0 1000/- करोड़ से अधिक की परियोजनायें उ0 प्र0 में निर्माणाधीन अथवा क्रियाशील है। मुख्यमंत्री मत्स्य सम्पदा योजनान्तर्गत किसानों की आय में वृद्धि एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ग्राम सभा एवं अन्य पट्टे के तालाबों में निवेश एवं मत्स्य बीज बैंक की स्थापना हेतु राज्य सरकार द्वारा दो परियोजनायें संचालित की जा रही है। जिसमे सुधारे गये ग्राम सभा व अन्य पट्टे के तालाबों में प्रथम वर्ष निवेश व सुधारे गये ग्राम सभा व अन्य पट्टे के तालाबों में मत्स्य बीज बैंक की स्थापना प्रमुख हैं। निषाद राज बोट सब्सिडी योजनान्तर्गत मत्स्य पालकों को एवं मछुआरा समुदाय के व्यक्तियों को मत्स्याखेट एवं नदियों/जलाशयों में मत्स्य प्रवन्धन व संरक्षण के माध्यम से रोजगार एवं आजिविका के लिए निषाद राज वोट सब्सिड़ी योजना के रूप में एक नवीन योजना राज्य सरकार द्वारा प्रारम्भ की गयी है।  कार्यक्रम में सी0आर0पी0एफ0 एवं एन0डी0आर0एफ0 के अधिकारी एवं जवानों द्वारा कार्यक्रम में हिस्सा लिया गया। 
  कार्यक्रम के प्रारम्भ में निदेशक मत्स्य प्रशान्त शर्मा द्वारा सभी अतिथियों को स्वागत करते हुये कार्यक्रम की रूप रेखा को विस्तार से अवगत कराया गया। कार्यक्रम में विभागीय गतिविधियों का वीडियों द्वारा भी प्रदर्शन किया गया एवं कार्यक्रम में प्रदर्शनी का भी आयोजन हुआ जिसमें मत्स्य विभाग के साथ-साथ अन्य संस्थाओं के द्वारा अपनी-अपनी सेवाओं एवं उत्पादों का भी प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में वाराणसी मण्डल के अतिरिक्त मण्डल प्रयागराज, मिर्जापुर एवं आजमगढ़ के लगभग 1000 मत्स्य पालकों द्वारा प्रतिभाग किया गया, कार्यक्रम का  संचालन एन0एस0 रहमानी, संयुक्त निदेशक मत्स्य, उ0प्र0 लखनऊ द्वारा किया गया।
   कार्यक्रम में उ0प्र0 सरकार के रविन्द्र कुमार जायसवाल, राज्य मंत्री स्टाम्प न्यायालय शुल्क एवं पंजीयन, अशोक कुमार तिवारी महापौर, वीरू साहनी सभापति उ0प्र0, मत्स्य जीवी सहकारी संघ लि0, उ0प्र0, सौरभ श्रीवास्तव विधायक कैण्ट, हिमांशु नागपाल आई0ए0एस0 मुख्य विकास अधिकारी भी उपस्थित रहें एवं विभाग की संचालित योजनाआें सम्बन्धित बुकलेट का विमोचन किया गया। 
    बताते चले कि देश में पहली बार गंगा में राज्यमीन (स्टेट फिश) चिताला की रिवर रैचिंग की जा रही हैं। नदियों की पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत रखने और गंगा को प्रदूषण मुक्त रखने में रिवर रैचिंग मददगार साबित होगी। चिताला मछली बड़े तादात में मछुआरों की आजीविका में सहायक होती है। मत्स्य विभाग के विशेष सचिव व निदेशक प्रशांत शर्मा ने बताया कि उत्तर प्रदेश में पहली बार स्टेट फिश चिताला की रिवर रैचिंग की जा रही हैं।इस मौके पर वाराणसी में गंगा नदी में लगभग 1 लाख चिताला मछलियों की अंगुलिकाये छोड़ी गयी। विशेष सचिव मत्स्य विभाग ने बताया कि चिताला मछली की रिवर रैचिंग से नदियों में इनकी संख्या में वृद्धि होगी, जिससे नदियों में पारस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी। मत्स्य पालकों की आय में वृद्धि होगी, साथ ही मछली खाने वाले लोगो को प्रोटीन युक्त पौष्टिक आहार उपलब्धता भी बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि राज्यमीन (स्टेट फिश) चिताला को इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) ने नियर थ्रीटेंड की श्रेणी में सम्मिलित किया है। इसके संवर्धन और संरक्षण के लिए सरकार रिवर रैचिंग का कार्यक्रम आयोजित कर रही है।दरअसल, विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुकी चिताला मछली का प्रदेश की सभी बड़ी नदियों और तालाबों में संवर्धन किया जा रहा हैं। उत्तर प्रदेश में चिताला मछली को राज्य मीन का दर्जा प्राप्त है। फिलहाल यह मछली विलुप्ति की कगार पर है। इस मछली को राज्य की मुख्य नदियों में तथा मत्स्य पालकों द्वारा तालाबों में संवर्धन किये जाने को लेकर सरकार ने खास योजना शुरू की है। चिताला संवर्धन प्रोजेक्ट के तहत मत्स्य पालन विभाग ने इसकी वंश वृद्धि के लिए एनबीएफजीआर के साथ एमओयू किया है। इसके तहत ब्यूरो की मदद से चिताला मछली को 'रिवर रैचिंग' के जरिए जलाशयों में पुनर्स्थापित किया जा रहा हैं। बताते चलें कि इस प्रोजेक्ट के पहले चरण में आगामी अगस्त महीने में अयोध्या में घाघरा, वाराणसी में गंगा तथा आगरा में यमुना नदी में रिवर रैचिंग का काम किया जाएगा। रिवर रैचिंग के माध्यम से नदियों को नाइट्रोजन युक्त प्रदूषण से मुक्ति दिलाने के लिए इनमें नदी को साफ करने वाली मछलियों का पालन किया जाता है। इससे नदी भी साफ होती है और मछली पालन से मछुआरों की आय में भी इजाफा होगा।

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