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योगी सरकार का बड़ा फैसला, अब बिना यूपीएससी के करेगी डीजीपी की नियुक्ति

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क्यों लिया गया यह फैसला ?

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति को लेकर बड़ा कदम उठाया है। नए नियमों के अनुसार, राज्य सरकार अब डीजीपी की नियुक्ति के लिए संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) पर निर्भर नहीं रहेगी। इस प्रक्रिया के तहत राज्य में 3 लाख पुलिस बल के लिए जल्द ही स्थायी डीजीपी की नियुक्ति की उम्मीद है।

कैबिनेट से मंजूरी, नए नियम लागू
कैबिनेट ने “उत्तर प्रदेश चयन एवं नियुक्ति नियमावली 2024” को मंजूरी दी है। इसके तहत हाईकोर्ट के रिटायर जज की अध्यक्षता में एक मनोनयन समिति का गठन किया जाएगा, जिसमें मुख्य सचिव, UPSC के नामित सदस्य, यूपी लोकसेवा आयोग के अध्यक्ष या उनके द्वारा नामित सदस्य, अपर मुख्य सचिव (गृह) और एक रिटायर्ड डीजीपी शामिल होंगे। यह समिति डीजीपी पद के लिए उम्मीदवार का चयन करेगी, जिसमें UPSC की भूमिका समाप्त कर दी गई है।

DGP के कार्यकाल की न्यूनतम अवधि और हटाने के नए प्रावधान

नए नियमों के तहत डीजीपी का कार्यकाल न्यूनतम 2 साल का होगा। हालांकि, अगर डीजीपी अपने दायित्वों का निर्वहन करने में विफल रहते हैं, तो सरकार उन्हें कार्यकाल पूरा होने से पहले भी हटा सकती है। यह सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों में किए गए बदलाव का हिस्सा है।

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प्रशांत कुमार हो सकते हैं अगले स्थायी DGP

माना जा रहा है कि 1990 बैच के आईपीएस अधिकारी प्रशांत कुमार को स्थायी डीजीपी नियुक्त किया जा सकता है। प्रशांत कुमार ने अब तक 300 से ज्यादा एनकाउंटर किए हैं और वर्तमान में कार्यवाहक डीजीपी के रूप में सेवा दे रहे हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ ने उन्हें कई वरिष्ठ अधिकारियों को दरकिनार कर कार्यवाहक डीजीपी बनाया था।

सुप्रीम कोर्ट का निर्देश और योगी सरकार की प्रतिक्रिया
सुप्रीम कोर्ट ने यूपी समेत सात राज्यों में कार्यवाहक डीजीपी की लगातार नियुक्ति पर नाराजगी जताई थी। कोर्ट ने इसे अवमानना का मामला मानते हुए राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया है। 14 नवंबर को इस मामले की सुनवाई होनी है। योगी सरकार के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का जवाब माना जा रहा है।

अखिलेश यादव का तंज
योगी सरकार के इस निर्णय पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने टिप्पणी की है। उन्होंने X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “किसी बड़े अधिकारी को स्थायी पद देने और उसका कार्यकाल 2 साल बढ़ाने की व्यवस्था बनाई जा रही है। सवाल ये है कि व्यवस्था बनाने वाले खुद 2 साल रहेंगे या नहीं। कहीं यह दिल्ली के हाथ से लगाम अपने हाथ में लेने की कोशिश तो नहीं है?”

उत्तर प्रदेश में स्थायी DGP की कमी
उत्तर प्रदेश पुलिस के पास पिछले 29 महीनों से स्थायी डीजीपी नहीं है। 2022 में मुकुल गोयल को हटाए जाने के बाद से लगातार कार्यवाहक डीजीपी की नियुक्ति की जा रही है। यूपी पुलिस बल, जो दुनिया की सबसे बड़ी पुलिस बलों में से एक है, पिछले 20 महीनों से कार्यवाहक डीजीपी के नेतृत्व में काम कर रही है। नए नियमों के लागू होने के बाद इस प्रक्रिया को स्थायित्व मिल सकता है।

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क्यों लिया गया यह फैसला?
डीजीपी की नियुक्ति प्रक्रिया में बार-बार हो रहे बदलाव और UPSC से पैनल भेजने की आवश्यकता से बचने के लिए योगी सरकार ने यह नया नियम लागू किया है।

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