वाराणसी
यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल होने पर सारनाथ को ऐतिहासिक उपलब्धि: प्रो. वांगचुक दोरजी नेगी
केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान के कुलपति ने कहा—यह भारत और विश्व के लिए गर्व का क्षण, बुद्ध का शांति संदेश आज भी प्रासंगिक
संस्कृति मंत्रालय, संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल के प्रयासों की सराहना
सारनाथ (वाराणसी)। केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान, सारनाथ के कुलपति प्रो. वांगचुक दोरजी नेगी ने सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने पर इसे भारत और पूरे विश्व के लिए एक ऐतिहासिक एवं गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह मान्यता उस पवित्र स्थल के वैश्विक महत्व को स्थापित करती है, जहां भगवान बुद्ध ने प्रथम उपदेश देकर धर्मचक्र प्रवर्तन किया था।
बुद्ध का संदेश आज भी विश्व के लिए प्रासंगिक
प्रो. नेगी ने कहा कि सारनाथ मानवता के लिए करुणा, ज्ञान और शांति का प्रतीक है। उन्होंने प्रधानमंत्री के उस विचार का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने विश्व को “बुद्ध” का संदेश दिया है, “युद्ध” का नहीं। उनके अनुसार, वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में शांति और सौहार्द का यह संदेश पहले से अधिक प्रासंगिक है।
सभी अनुयायियों को दी बधाई
उन्होंने सारनाथ को विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने पर देशवासियों और भगवान बुद्ध के मार्ग का अनुसरण करने वाले सभी अनुयायियों को हार्दिक बधाई दी। साथ ही कामना की कि तथागत बुद्ध का करुणा और शांति का मार्ग पूरी मानवता का मार्गदर्शन करता रहे।
संस्कृति मंत्रालय के प्रयासों की सराहना
प्रो. नेगी ने इस उपलब्धि के लिए भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय, केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत तथा संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल के नेतृत्व और प्रयासों की सराहना करते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि देश की सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और उन्हें वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है।
