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वाराणसी

भारतीय आर्थिक विचारों पर समसामयिक आख्यान – भारतीय रिजर्व बैंक, लखनऊ द्वारा संगोष्ठी का आयोजन

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रिपोर्ट – प्रदीप कुमार

वाराणसी: भारतीय रिज़र्व बैंक, लखनऊ ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी में “भारतीय आर्थिक विचारों पर समकालीन आख्यान” विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया। सभी G20 फाइनेंस ट्रैक बैठकों के सह-मेजबान के रूप में, भारतीय रिज़र्व बैंक ने 13-14 सितंबर, 2023 को वाराणसी में आयोजित चौथी सतत वित्त कार्य समूह की बैठक में भाग लिया। भारत की G20 अध्यक्षता की पृष्ठभूमि पर संगोष्ठी का आयोजन हुआ, जहाँ देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के साथ ही आर्थिक अंतर्दृष्टि पर बौद्धिक चर्चा हुई। इसमें आर्थिक और राजकोषीय नीति, शासन, सार्वजनिक नीति और भारतीय न्यायशास्त्र की प्राचीन भारतीय कहानी को रेखांकित किया गया।

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डॉ. बालू केंचप्पा, क्षेत्रीय निदेशक, भारतीय रिजर्व बैंक, लखनऊ ने सभी प्रतिभागियों का गर्मजोशी से स्वागत किया। G20 के महान आर्थिक सूत्र ‘वसुधैव कुटुंबकम’ पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने “एक पृथ्वी, एक परिवार और एक भविष्य” में निहित सामूहिक प्रयासों के महत्व और वैश्विक आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में इसकी भूमिका पर ज़ोर दिया। डॉ. नागेंद्र, कुलाधिपति, स्वामी विवेकानन्द योग अनुसंधान संस्थान (एस-व्यासा) विश्वविद्यालय, बेंगलुरु द्वारा दिया गया मुख्य सम्बोधन संगोष्ठी का एक उल्लेखनीय आकर्षण रहा, जिसके उपरांत व्यापक रूप से पैनल द्वारा ज्ञानवर्धक चर्चा हुई। अपने संबोधन में, डॉ. नागेंद्र ने बताया कि कैसे प्राचीन भारतीय आर्थिक विचार भारत की संस्कृति, परंपरा और अंतर्निहित राष्ट्रीय विशेषताओं में गहरी अंतर्दृष्टि प्रदान करते रहे है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि कैसे वेदों, अर्थशास्त्र, रामायण और महाभारत, मनुस्मृति, शुक्रनीति और कई अन्य प्राचीन भारतीय ग्रंथों के साथ राजनीति, नैतिकता और अर्थशास्त्र के जुड़ाव ने कुशलतापूर्वक और समग्र रूप से देश के विकास और भलाई में योगदान दिया है। इसके उपरांत, डॉ. आशुतोष यशवंत राराविकर, निदेशक, आर्थिक और नीति अनुसंधान विभाग, भारतीय रिजर्व बैंक, मुंबई ने इसके इतिहास और समृद्ध विकास पर चर्चा की। डॉ. मंजूषा पंढरीनाथ कुलकर्णी, प्रशासनिक अधिकारी, उपमुख्यमंत्री सचिवालय, महाराष्ट्र ने कौटिल्य अर्थशास्त्र की उत्पत्ति के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी और इसके सिद्धांतों की समकालीन प्रासंगिकता पर अपने विचार व्यक्त किए। “सकल घरेलू उत्पाद और सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता को संतुलित करने में दुविधाएं – प्राचीन ग्रंथों से सीख” विषय पर पैनल चर्चा में प्रोफेसर मनोज कुमार अग्रवाल, प्रमुख, अर्थशास्त्र विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय सहित प्रतिष्ठित शिक्षाविद शामिल हुए; साथ ही प्रो. सुधाकर मिश्र, वेदांत विभाग, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी; और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के प्रमुख प्रोफेसर मृत्युंजय मिश्रा ने, रोचक तथ्यों द्वारा दर्शकों को बांधे रखा । पैनल चर्चा का संचालन डॉ. बालू केंचप्पा, क्षेत्रीय निदेशक, लखनऊ द्वारा किया गया। वक्ताओं ने कई प्राचीन ग्रंथों, विशेष रूप से कौटिल्य रचित अर्थशास्त्र संबंधी महत्वपूर्ण सीखों के बारे में जानकारी दी, जिसमें सैद्धान्तिक पहलूओं पर प्रशासनिक प्रक्रियाओं, राजाओं, मंत्रियों और सरकारी अधिकारियों के कर्तव्यों की ऐतिहासिक प्रासंगिकता का स्पष्ट रूप से वर्णन किया गया है। वर्तमान समय में, इसकी समसामयिक प्रासंगिकता, आर्थिक विकास और समग्र कल्याण के लिए बहुमूल्य है।इस संगोष्ठी ने एक उल्लेखनीय मंच के रूप में, भारत के आर्थिक विचारों, दर्शन, ज्ञान और इतिहास का उल्लेख करने वाले प्राचीन भारतीय अर्थशास्त्र और नीति निर्माण की आकर्षक अंतर्दृष्टि पर प्रकाश डाला और उनकी प्रासंगिकता को सामने रखने का सफल प्रयास किया। कार्यक्रम में लगभग 250 विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने भाग लिया। ऐसे मंच प्रतिभागियों के बीच रुचि और दक्षताओं का निर्माण हेतु महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते है।

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