गाजीपुर
बहरियाबाद में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई गई गुरु पूर्णिमा
गुरु-शिष्य परंपरा का हुआ सम्मान
मंदिरों और आश्रमों में हुई विशेष पूजा-अर्चना, महर्षि वेदव्यास के योगदान को किया गया स्मरण
बहरियाबाद (गाजीपुर)। बहरियाबाद एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में गुरु पूर्णिमा का पर्व श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। मंदिरों, आश्रमों एवं विभिन्न धार्मिक स्थलों पर विशेष पूजा-अर्चना, गुरु वंदना, भजन-कीर्तन और आध्यात्मिक प्रवचनों का आयोजन हुआ। श्रद्धालुओं ने अपने गुरुजनों का पूजन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
गुरु-शिष्य परंपरा का पर्व
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि गुरु-शिष्य परंपरा, ज्ञान, कृतज्ञता और संस्कारों को समर्पित पावन अवसर है। उन्होंने बताया कि आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह पर्व भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व रखता है और इसे व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है।
महर्षि वेदव्यास के योगदान का स्मरण
वक्ताओं ने कहा कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास का जन्म हुआ था। उन्होंने वेदों का संकलन कर उन्हें चार भागों में विभाजित किया तथा महाभारत, 18 पुराणों और श्रीमद्भागवत जैसे महान ग्रंथों की रचना कर मानवता को अमूल्य ज्ञान प्रदान किया। इसी कारण उन्हें ‘आदिगुरु’ के रूप में सम्मान दिया जाता है।
महापुरुषों के संदेशों पर हुई चर्चा
कार्यक्रमों में भगवान शिव द्वारा सप्तऋषियों को योग का उपदेश, भगवान बुद्ध के प्रथम धर्मोपदेश तथा भगवान महावीर की गुरु-शिष्य परंपरा का भी उल्लेख किया गया। वक्ताओं ने कहा कि सच्चा गुरु वही है, जो मनुष्य को अज्ञान से ज्ञान और अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाए।
भक्ति और अनुशासन के साथ हुआ आयोजन
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर श्रद्धालुओं ने अपने आध्यात्मिक एवं शैक्षणिक गुरुओं का पूजन कर पुष्प अर्पित किए और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। विभिन्न धार्मिक स्थलों पर गुरु-वाणी, कबीर के दोहे, भजन और ज्ञानवर्धक प्रवचनों का आयोजन हुआ, जिससे पूरे क्षेत्र का वातावरण भक्तिमय बना रहा।
