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गाजीपुर

पशु तस्करी से किसानों पर बढ़ता आर्थिक संकट

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दुधारू पशुओं की चोरी से परेशानी

बहरियाबाद (गाजीपुर) जयदेश। इस समय पशु तस्करी आये दिन हो रहा है जिसके चलते पशुपालकों के दुधारू पशुओं की चोरी की घटनाएं दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। पशु तस्करी न केवल एक कानूनी अपराध है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले किसानों के लिए एक गंभीर संकट भी है। यह समस्या किसानों को आर्थिक और मानसिक दोनों स्तरों पर प्रभावित करती है।

एक किसान के लिए उसका पशु (गाय, भैंस या बैल) एक चलती-फिरती संपत्ति की तरह होता है। तस्करी या चोरी होने पर किसान को हजारों-लाखों रुपयों का घाटा होता है, जिसकी भरपाई करने में उसे सालों लग जाते हैं। छोटे किसानों के लिए पशु ही खाद और दूध की आय का जरिया होते हैं। तस्करी के कारण उनकी दैनिक आय का स्रोत खत्म हो जाता है। तस्कर अक्सर रात के अंधेरे में उन गांवों को निशाना बनाते हैं जहाँ सुरक्षा कम होती है।

कई बार पशुओं को एक राज्य से दूसरे राज्य ले जाने के लिए फर्जी परमिट या कृषि कार्यों के नाम पर कागजात तैयार किए जाते हैं। तस्करी के दौरान पशुओं को वाहनों में बहुत ही अमानवीय तरीके से ठूंस-ठूंस कर भरा जाता है, जिससे कई पशु दम तोड़ देते हैं। पशुओं की चोरी से गांवों में डर और असुरक्षा का माहौल पैदा होता है, जिससे किसानों को रात-रात भर जागकर अपने पशुओं की रखवाली करनी पड़ती है।

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कई बार असली किसान भी जब अपने पशुओं को हाट (बाजार) ले जाते हैं, तो उन्हें तस्करी के शक में कानूनी समस्याओं या असामाजिक तत्वों के गुस्से का सामना करना पड़ता है। पशु तस्करी को रोकना सिर्फ पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसके लिए जागरूक समाज और सतर्क किसान का होना भी बहुत जरूरी है।

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