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वाराणसी

पंडित जवाहरलाल नेहरू की 63वीं पुण्यतिथि पर हुई विचार गोष्ठी

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वाराणसी। आधुनिक भारत के महान शिल्पकार एवं देश के प्रथम प्रधानमंत्री युग पुरुष पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा किए गए राष्ट्र निर्माण की अमिट विकास गाथा आज भी आजाद भारत के कोने-कोने में अंकित है। केवल अनर्गल टीका-टिप्पणी के सहारे कोई भी व्यक्ति उस ऊंचाई तक नहीं पहुंच सकता। बौने कद के लोग चाहे जितना प्रयास कर लें, क्योंकि नेहरू जैसे महान व्यक्तित्व सदियों में जन्म लेते हैं, प्रतिदिन नहीं।

उक्त विचार ईंगलिसियालाइन स्थित पंडित कमलापति त्रिपाठी फाउंडेशन के कार्यालय में आयोजित पंडित जवाहरलाल नेहरू जी की 63वीं पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए वक्ताओं ने व्यक्त किए।

वक्ताओं ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के सानिध्य में रहकर देश को आजादी दिलाने के लिए दशकों तक जेल की यातनाएं सहने वाले महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित जवाहरलाल नेहरू ने आजाद भारत के प्रथम प्रधानमंत्री के रूप में आधुनिक भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। राष्ट्र के महान शिल्पकार, चिंतक, विचारक, लेखक और युगदृष्टा के रूप में उन्होंने सैकड़ों वर्षों की गुलामी झेल चुके देश को नई दिशा दी।

उन्होंने कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के नेतृत्व में स्वतंत्रता आंदोलन में अपनी सारी सुख-सुविधाएं त्याग दीं और लंबे समय तक जेल में रहकर यातनाएं सही। देश की आजादी के बाद प्रथम प्रधानमंत्री के रूप में आधुनिक भारत के नव निर्माण का जो सपना उन्होंने देखा, उसे पूरा करने के लिए जीवन की अंतिम सांस तक कार्य किया। साथ ही ज्ञान, विज्ञान, कला, कौशल और प्रौद्योगिकी के माध्यम से देश को ऐसी मजबूत नींव प्रदान की, जिस पर आज के नए भारत की पूरी इमारत खड़ी हो सकी है।

वक्ताओं ने कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, सच्चे लोकतंत्रवादी नेता, उच्चकोटि के विद्वान, साहित्यकार, प्रख्यात लेखक और दूरदर्शी जननायक थे। उनका प्रत्येक कदम देश को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में उठता था तथा उनका पूरा जीवन देश सेवा को समर्पित रहा। संसाधनों की कमी के बावजूद उन्होंने भारत को स्वाभिमानी और आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में विश्व पटल पर स्थापित किया।

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उन्होंने अपनी बौद्धिक क्षमता और कुशल नेतृत्व के बल पर वैश्विक राजनीति में गहरी पहचान बनाई और स्वयं को विश्व स्तर के स्टेट्समैन के रूप में स्थापित किया। अपनी नेतृत्व क्षमता से उन्होंने विकास की अनेक योजनाएं संचालित कर भारत को आधुनिक, विकासशील और वैज्ञानिक दृष्टिकोण वाले राष्ट्र के रूप में विकसित किया। उनके विचारों में विश्व बंधुत्व की भावना निहित थी और समाज के हर वर्ग को आपसी एकता, प्रेम और सौहार्द के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली। इसी कारण तत्कालीन विश्व के महानतम नेताओं में उनका नाम शामिल था।

वक्ताओं ने कहा कि आज सत्ता में बैठे कुछ अहंकारी, अदूरदर्शी और अवैज्ञानिक सोच वाले नेता पंडित जवाहरलाल नेहरू जैसे सर्वकालिक महान नेता द्वारा स्थापित उच्च मानकों के आसपास भी नहीं पहुंचते, फिर भी उनकी आलोचना कर स्वयं को महान साबित करने का प्रयास करते रहते हैं।

उन्होंने कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में दर्ज कराए गए अविस्मरणीय योगदान को वर्तमान और आने वाली पीढ़ियां कभी भुला नहीं सकेंगी तथा सदैव उनके प्रति कृतज्ञ रहेंगी।

विचार गोष्ठी प्रारंभ होने से पूर्व उपस्थित लोगों ने पंडित जवाहरलाल नेहरू जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

विचार गोष्ठी की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश सिंचाई आयोग के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ नेता पंडित विजय शंकर पाण्डेय ने की, जबकि संचालन फाउंडेशन के सचिव श्री बैजनाथ सिंह ने किया। गोष्ठी में सर्वश्री राधे लाल एडवोकेट, डाक्टर अनिल कुमार उपाध्याय, भूपेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट, आनन्द सिंह, डॉक्टर पी0एस0 पांडे, मनोज चौबे, विजय कृष्ण राय अन्नू, आनन्द मिश्रा, ब्रह्म देव मिश्रा, पुनीत मिश्रा, वैभव त्रिपाठी, महेन्द्र सिंह चौहान, कमलाकात पांडे, विवेक सिंह, पंकज मिश्रा एडवोकेट, सुशील सोनकर, सुवाष राम, डाक्टर संजय चौहान, अशोक कुमार पाण्डेय, मोहम्मद अरशद, युवराज पाण्डेय, पिन्टू शेख आदि लोगों ने अपने विचार व्यक्त किए।

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