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वाराणसी

निजीकरण के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन, यूपी में विद्युत कर्मी लामबंद

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वाराणसी। उत्तर प्रदेश में बिजली के निजीकरण के खिलाफ आज विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन किया गया। कर्मचारियों और अभियंताओं ने काली पट्टी बांधकर अपनी विरोधी भावना व्यक्त की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस फैसले को तुरंत वापस लेने की अपील की।

विरोध प्रदर्शन में कर्मचारियों ने विभाग के प्रति अपनी निष्ठा और उपभोक्ताओं की सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। हालांकि, यह सुनिश्चित किया गया कि विरोध प्रदर्शनों से विद्युत आपूर्ति में कोई विघ्न न आए। प्रदर्शनकारियों ने निजीकरण के खिलाफ मजबूत एकता का प्रदर्शन किया और भविष्य में निर्णायक संघर्ष के लिए संकल्प लिया।

11 दिसंबर को लखनऊ में होगी बैठक
नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स (NCCOEEE) द्वारा 11 दिसंबर को लखनऊ में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें उत्तर प्रदेश और चंडीगढ़ में बिजली के निजीकरण के खिलाफ राष्ट्रव्यापी आंदोलन की रणनीति पर विचार किया जाएगा। इस बैठक में देशभर के प्रमुख बिजली कर्मचारी और इंजीनियर संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मचारियों के इस आंदोलन को महाराष्ट्र और पंजाब के बिजली कर्मचारियों का भी समर्थन प्राप्त हुआ है। इन राज्यों में भी प्रदर्शन किए गए और सरकार से निजीकरण के प्रस्ताव को वापस लेने की मांग की गई।

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संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की है कि वे बिजली के निजीकरण के निर्णय पर पुनर्विचार करें। समिति ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मचारियों ने अब तक उत्कृष्ट सेवाएं प्रदान की हैं, और 30,000 मेगावाट बिजली आपूर्ति का रिकॉर्ड बनाया है। ऐसे में निजीकरण न केवल कर्मचारियों के लिए, बल्कि उपभोक्ताओं के लिए भी हानिकारक होगा।

विरोध प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने कार्यालय परिसर में नारेबाजी की और अपनी एकजुटता दिखाई। संघर्ष समिति ने यह स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन बिजली कर्मचारियों के अधिकारों और उपभोक्ताओं की भलाई के लिए लगातार जारी रहेगा।

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