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वाराणसी

भाई दूज : बहनों ने भाई की लंबी उम्र की कामना के लिए गंगा घाट पर किया पूजा-पाठ

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जाने भाई दूज की रोचक कथा

वाराणसी। भाई दूज के अवसर पर वाराणसी में बहनों ने अपने भाइयों की लंबी उम्र और उनकी सुरक्षा की कामना के लिए गंगा घाट पर आस्था और श्रद्धा के साथ पूजा-पाठ किया। शहर के अस्सी घाट पर सुबह से ही महिलाओं का जमावड़ा देखने को मिला, जहां परंपरागत रूप से गोवर्धन बनाकर विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की गई। महिलाओं ने समूह में गोला बनाकर बीच में गोबर से गोधन बनाया और पूजा शुरू की। पूजा संपन्न करने के बाद सभी ने आरती की और प्रसाद का वितरण किया।

श्राप और प्रायश्चित की अनोखी परंपरा

भाई दूज की इस पूजा में बहनों ने अपने भाइयों को प्रतीकात्मक रूप से मृत्यु का श्राप देकर एक अनूठी परंपरा का निर्वाह किया। इसके बाद बहनों ने अपनी जीभ पर कांटा चुभाकर श्राप का प्रायश्चित किया। साथ ही गोबर के प्रतीकात्मक गोधन को कूटते हुए अपने भाइयों की सुरक्षा की कामना की। पूजा संपन्न होने पर भाइयों ने बहनों को उपहार भेंट कर इस पारंपरिक आयोजन को मनाया।

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भाई दूज की कथा

पंडित विकास के अनुसार, भाई दूज की परंपरा के पीछे एक रोचक कथा है। मान्यता है कि एक बार यमराज और उनकी बहन यमनी ऐसे व्यक्ति की खोज में थे, जिसकी बहन ने उसे कभी श्राप न दिया हो। यमराज ऐसे व्यक्ति को यमलोक ले जाना चाहते थे। खोज के दौरान एक ऐसा व्यक्ति मिला भी। लेकिन जब उसकी बहन को यह पता चला तो उसने अपने भाई की रक्षा के लिए उसे श्राप दिया और अपशब्द कहे। तब यमराज और यमनी उसके प्राण नहीं ले सके। तभी से यह परंपरा प्रचलित हो गई।

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