भदोही
ललही छठ पर माताओं ने की ललही माता की पूजा, पुत्रों की सलामती की कामना
दिनभर रखा व्रत, छीउल-कूसा गाड़कर विधि-विधान से की पूजा; चककिसुनदास, बारी, चकसिखारी व नन्दापुर में दिखी आस्था
ज्ञानपुर। पुत्रों की सलामती, दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना को लेकर बुधवार को जिले में हलषष्ठी यानी ललही छठ का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विवाहित महिलाओं ने दिनभर व्रत रखकर ललही माता की पूजा-अर्चना की और संतान के मंगल की कामना की।
भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी को मनाए जाने वाले इस पर्व पर महिलाओं ने समूह में एकत्र होकर छीउल और कूसा को जमीन में गाड़कर विधि-विधान से पूजा की। पूजा-अर्चना और कथा श्रवण के बाद व्रती महिलाओं ने नदी अथवा तालाब में बिना हल चलाए उगने वाले चावल और दही का सेवन कर व्रत का पारण किया। कई महिलाओं ने पुत्र प्राप्ति की कामना से भी व्रत रखा।
डॉ. महेश त्रिपाठी के अनुसार मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम का जन्म हुआ था। इस दिन महिलाएं उपवास रखकर हलषष्ठी माता की कथा सुनती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार कंस के अत्याचार से देवकी की संतानों की रक्षा के लिए हलषष्ठी माता का व्रत किया गया था। व्रत के प्रभाव से देवकी के गर्भ में पल रहे सातवें पुत्र को योगमाया ने रोहिणी के गर्भ में स्थानांतरित कर दिया, जहां बाद में बलराम का जन्म हुआ। इसके बाद देवकी के आठवें पुत्र के रूप में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। मान्यता है कि देवकी के व्रत से दोनों पुत्र सुरक्षित रहे। तभी से माताएं संतान की दीर्घायु और रक्षा के लिए यह व्रत करती आ रही हैं।
कांवल प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र के चककिसुनदास, बारी, चकसिखारी और नन्दापुर सहित विभिन्न स्थानों पर महिलाओं ने सामूहिक रूप से ललही माता की पूजा कर संतान के उज्ज्वल भविष्य और दीर्घायु की कामना की।
