चन्दौली
सकलडीहा-चहनिया में बारिश ने बढ़ाई मुसीबत, हजारों बीघा धान की फसल जलमग्न
घर-स्कूल और संपर्क मार्गों तक पहुंचा पानी, 28 किमी लेहरा-मनिहरा ड्रेन की सफाई पर उठे सवाल
सकलडीहा (चन्दौली)। सकलडीहा और चहनिया क्षेत्र में लगातार हुई भारी बारिश के बाद जलभराव की समस्या गंभीर हो गई है। सकलडीहा, खड़ेहरा, जलालपुर, रिष्टी, लेहरा, मनिहरा समेत कई गांवों में खेत, संपर्क मार्ग और निचले इलाकों में पानी भर गया है। कई जगह सड़कें जलमग्न होने से ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
हजारों बीघा धान की फसल पानी में डूबी
जलभराव का सबसे अधिक असर किसानों पर पड़ा है। ग्रामीणों के मुताबिक क्षेत्र में हजारों बीघा धान की फसल पानी में डूबी हुई है। खेतों में लंबे समय से पानी जमा रहने से फसल के सड़ने और खराब होने की आशंका बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द पानी की निकासी नहीं हुई तो महीनों की मेहनत के साथ खेती में लगाया गया पैसा भी बर्बाद हो सकता है।
घरों और स्कूलों तक पहुंचा बारिश का पानी
कई गांवों में बारिश का पानी लोगों के घरों तक पहुंच गया है। घरों में पानी घुसने के बाद ग्रामीण खुद ही पानी निकालने में जुटे हैं। संपर्क मार्गों पर जलभराव के कारण स्कूली बच्चों की परेशानी भी बढ़ गई है। ग्रामीणों के अनुसार कई स्थानों पर बच्चों को मुख्य मार्ग और एनएच तक छोड़ने की स्थिति बन गई है। प्राथमिक विद्यालयों तक जाने वाले रास्तों पर पानी भरने से बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।
28 किलोमीटर लंबी ड्रेन की सफाई पर सवाल
किसानों और ग्रामीणों ने लेहरा-मनिहरा ड्रेन की सफाई और जलनिकासी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि बंदी डिवीजन के अंतर्गत आने वाली करीब 28 किलोमीटर लंबी ड्रेन की सिल्ट सफाई पर इसी वित्तीय वर्ष में लाखों रुपये खर्च किए गए, लेकिन भारी बारिश के बाद भी पानी की निकासी नहीं हो पा रही है।
ग्रामीणों ने सफाई कार्य में कथित अनियमितता का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि ड्रेन की ठीक से सफाई हुई होती तो बारिश का पानी इतनी बड़ी मात्रा में खेतों और गांवों में नहीं रुकता।
पूर्व प्रधान हीरा लाल ने कहा कि यदि जल्द पानी की निकासी नहीं कराई गई तो धान की फसल को भारी नुकसान हो सकता है।
‘अधिकारी गांव में आएं तो सामने आएगी असली तस्वीर’
ग्रामीणों ने लेखपाल, तहसीलदार और उपजिलाधिकारी के गांवों में पहुंचकर स्थलीय निरीक्षण नहीं करने पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि यदि अधिकारी स्वयं खेतों, सड़कों, नालों और ड्रेन का निरीक्षण करें तो जलनिकासी व्यवस्था की वास्तविक स्थिति सामने आ जाएगी।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि ग्राम प्रधानों और सचिवों पर गांवों को बाढ़ या जलभराव प्रभावित न दिखाने का दबाव बनाया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों की मांग है कि कागजी रिपोर्ट के बजाय अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का आकलन करना चाहिए।
स्टेट हाईवे-69 के निर्माण पर भी उठे सवाल
ग्रामीणों ने स्टेट हाईवे-69 के निर्माण कार्य को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि सड़क निर्माण और जलनिकासी व्यवस्था से जुड़ी कथित खामियों के कारण बारिश का पानी कई इलाकों से तेजी से बाहर नहीं निकल पा रहा है। ग्रामीणों ने पूरे क्षेत्र की जलनिकासी व्यवस्था की तकनीकी जांच कराने की मांग की है।
निरीक्षण नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी
किसानों और ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल गांवों का स्थलीय निरीक्षण कराने, लेहरा-मनिहरा ड्रेन की सफाई कराने और जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि अधिकारी मौके पर पहुंचकर निष्पक्ष निरीक्षण नहीं करते और जलभराव की समस्या का समाधान नहीं कराया जाता है तो वे धरना-प्रदर्शन और आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
इस दौरान रामसेवक यादव, राधेश्याम यादव, नखडू पासवान, रामकरन यादव, प्रमोद यादव, राजकुमार यादव सहित कई किसानों ने जलभराव और फसल बर्बादी को लेकर चिंता जताई।
