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गोरखपुर

एमएमएमयूटी में इंटेलिजेंट एंड स्मार्ट कम्प्यूटिंग पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ

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एआई से बदलेगी भविष्य की तकनीक, 1369 शोधपत्रों में 225 का हुआ चयन; साइबर सुरक्षा, इलेक्ट्रिक वाहन और बैटरी प्रबंधन पर मंथन

गोरखपुर। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) के सूचना प्रौद्योगिकी एवं कंप्यूटर अनुप्रयोग विभाग की ओर से ‘इंटेलिजेंट एंड स्मार्ट कम्प्यूटिंग’ विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। सम्मेलन में देश-विदेश के शिक्षाविद, शोधकर्ता, उद्योग विशेषज्ञ और विद्यार्थी एक मंच पर जुटे हैं। उद्घाटन सत्र में विशेषज्ञों ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) अब केवल बड़े कंप्यूटर और सर्वर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सीमित संसाधनों वाले उपकरणों, ऊर्जा प्रणालियों, इलेक्ट्रिक वाहनों और बैटरी प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में भी तकनीक की नई दिशा तय करेगी।

1369 शोधपत्र मिले, 225 का चयन

सम्मेलन के लिए कुल 1369 शोधपत्र प्राप्त हुए, जिनकी गहन समीक्षा के बाद 225 शोधपत्रों का चयन प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। विश्वविद्यालय के अनुसार एमएमएमयूटी के इतिहास में यह पहली बार है जब किसी विभाग की ओर से आयोजित सम्मेलन में इतनी बड़ी संख्या में शोधपत्र प्राप्त हुए हैं।

दो दिवसीय सम्मेलन में इंटेलिजेंट कम्प्यूटिंग, स्मार्ट कम्प्यूटिंग, साइबर सुरक्षा, ऊर्जा प्रणाली, इलेक्ट्रिक वाहन और बैटरी प्रबंधन समेत आधुनिक तकनीकों पर विशेषज्ञ विचार-विमर्श कर रहे हैं।

कम संसाधनों में बेहतर परिणाम देना एआई की अगली चुनौती : डॉ. सुदत्ता कर

विशिष्ट अतिथि कैपजेमिनी की वाइस प्रेसिडेंट एवं एआई हेड डॉ. सुदत्ता कर ने कहा कि एआई के विकास की यात्रा अब ऐसे दौर में पहुंच चुकी है, जहां इसे केवल बड़े सर्वर और पारंपरिक कंप्यूटर प्रणालियों तक सीमित करके देखना पर्याप्त नहीं है। एआई तेजी से एम्बेडेड सिस्टम और सीमित संसाधनों वाले उपकरणों तक पहुंच रहा है।

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उन्होंने कहा कि ऐसे उपकरणों में ऊर्जा और कंप्यूटिंग क्षमता सीमित होती है। इसलिए चुनौती ऐसी तकनीक विकसित करने की है, जो कम ऊर्जा और सीमित कंप्यूटिंग संसाधनों में भी बेहतर परिणाम दे सके। उन्होंने एआई के सुरक्षित, जिम्मेदार और प्रभावी उपयोग पर भी जोर दिया।

डॉ. कर ने युवा इंजीनियरों और शोधार्थियों से निरंतर सीखने तथा नए प्रयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शोध और नवाचार में हर प्रयोग सफल नहीं होता, लेकिन असफल प्रयोग भी बेहतर समाधान विकसित करने के लिए महत्वपूर्ण सीख देते हैं।

एआई और भौतिक विज्ञान के मेल से बनेंगे भरोसेमंद ऊर्जा समाधान : प्रो. सूर्यवंशी

मुख्य अतिथि एनआईटी हमीरपुर के निदेशक प्रो. एच.एम. सूर्यवंशी ने ऊर्जा क्षेत्र में स्मार्ट कम्प्यूटिंग की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहन और बैटरी प्रबंधन प्रणाली भविष्य की ऊर्जा व्यवस्था के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।

उन्होंने बताया कि एआई आधारित तकनीक से ऊर्जा प्रबंधन, अनुकूली नियंत्रण तथा बैटरी की स्थिति का बेहतर आकलन और पूर्वानुमान किया जा सकता है। इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते उपयोग के बीच बैटरी की स्थिति और प्रदर्शन की निगरानी बेहद महत्वपूर्ण है।

प्रो. सूर्यवंशी ने डिजिटल ट्विन जैसी तकनीकों को भी उपयोगी बताते हुए कहा कि इनके माध्यम से जटिल ऊर्जा प्रणालियों की निगरानी और कार्यक्षमता में सुधार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भविष्य की बुद्धिमान ऊर्जा प्रणालियों को अधिक भरोसेमंद बनाने के लिए एआई को भौतिक विज्ञान के मूलभूत नियमों के साथ जोड़ना होगा।

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उभरती तकनीकों के लिए विद्यार्थियों को तैयार कर रहा एमएमएमयूटी : कुलपति

एमएमएमयूटी की कुलपति प्रो. अनुपमा कौशिक शर्मा ने कहा कि एआई और स्मार्ट कम्प्यूटिंग आने वाले वर्षों की महत्वपूर्ण तकनीकों में शामिल होंगी। विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने और उन्हें शोध एवं उद्योग की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने पर विशेष जोर दे रहा है।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को केवल पारंपरिक ज्ञान तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं है। उन्हें उभरती तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग, शोध और नवाचार से जोड़ना आवश्यक है। विश्वविद्यालय में एआई, साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष तकनीक जैसे क्षेत्रों में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के माध्यम से प्रशिक्षण एवं शोध के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

निरंतर सीखना और नवाचार जरूरी : प्रो. एस.एन. सिंह

अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी एवं प्रबंधन संस्थान के निदेशक प्रो. एस.एन. सिंह ने कहा कि तकनीकी क्षेत्र में बदलाव की गति बहुत तेज है। ऐसे में शोधार्थियों के लिए केवल वर्तमान तकनीक का ज्ञान पर्याप्त नहीं है। उन्हें भविष्य की संभावनाओं और चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए अपने ज्ञान और कौशल को लगातार विकसित करना होगा।

उन्होंने तकनीकी दक्षता के साथ सीखने की निरंतरता, नवाचार और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालने की क्षमता को जरूरी बताया।

अकादमिक जगत और उद्योग के बीच सहयोग पर जोर

विभागाध्यक्ष प्रो. डी.एस. सिंह ने अतिथियों, विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य अकादमिक जगत, उद्योग और शोध संस्थानों को साझा मंच उपलब्ध कराकर वास्तविक जीवन की समस्याओं के लिए स्मार्ट एवं प्रभावी तकनीकी समाधान तलाशना है।

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उद्घाटन समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ हुआ। इस दौरान अतिथियों एवं विशेषज्ञों को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। सम्मेलन समन्वयक डॉ. आशीष श्रीवास्तव ने आयोजन से जुड़े सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम में आयोजन समिति के प्रो. एस.पी. सिंह, प्रो. जय प्रकाश, प्रो. शिव प्रकाश, डॉ. आदिथन शिवरामन, डॉ. आर.के. द्विवेदी सहित विश्वविद्यालय के अधिकारी, शिक्षक, शोधार्थी, प्रतिभागी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।

दो दिनों तक उभरती तकनीकों पर होगा मंथन

सम्मेलन के आगामी सत्रों में चयनित शोधपत्रों की प्रस्तुतियां होंगी। इसके साथ ही स्मार्ट कम्प्यूटिंग, साइबर सुरक्षा, ऊर्जा प्रणाली, इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी प्रबंधन और अन्य उभरती तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग, भविष्य की संभावनाओं तथा शोध सहयोग पर विशेषज्ञों के बीच चर्चा जारी रहेगी।

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