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चन्दौली

मासूम के मेडिकल में घंटों की देरी, व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

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चकिया। डेढ़ वर्ष की मासूम के साथ दुष्कर्म के आरोपित की गिरफ्तारी के बाद अब मेडिकल प्रक्रिया में कथित देरी ने स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित परिवार को रात करीब 11 बजे से अगले दिन दोपहर दो बजे के बाद तक मेडिकल के लिए चकिया से चंदौली और फिर चंदौली से चकिया के चक्कर लगाने पड़े। इससे परिजनों के साथ ही स्थानीय लोगों में भी आक्रोश बढ़ता गया। बताया गया कि मासूम को मेडिकल के लिए जिला संयुक्त चिकित्सालय लाया गया, लेकिन बाद में उसे दोबारा चंदौली भेजे जाने की बात सामने आने पर लोग आक्रोशित हो गए। सभासद ज्योति गुप्ता, रवि गुप्ता, राजू वर्मा, मोहन वर्मा, शिवरतन गुप्ता, राजकिशोर, बुद्धू, प्रदीप गुप्ता, राजन गुप्ता और अनिल साहू समेत बड़ी संख्या में लोग अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंच गए। लोगों ने तत्काल सीएमएस को मौके पर बुलाने की मांग की। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएमएस मौके पर पहुंचे और परिजनों व लोगों की बात सुनी। इसके बाद ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक डॉ. रोमा को बुलाकर तत्काल मेडिकल परीक्षण कराने का निर्देश दिया। काफी प्रयास के बाद मासूम का मेडिकल परीक्षण कराय मेडिकल में देरी की जानकारी मिलते ही क्षेत्रीय विधायक कैलाश आचार्य ने लखनऊ से ही मामले में हस्तक्षेप किया। उन्होंने सीएमएस, सीएमओ, थाना प्रभारी और पुलिस अधीक्षक से फोन पर वार्ता कर मासूम की मेडिकल प्रक्रिया तत्काल पूरी कराने के निर्देश दिए। प्रभारी मंत्री ने भी अधिकारियों से बात कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। व्यापार मंडल अध्यक्ष विष्णु जायसवाल के नेतृत्व में मनोज चौहान, अंकित समेत अन्य व्यापारियों ने भी पीड़ित परिवार के साथ खड़े होकर तत्काल मेडिकल और आरोपित के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की। देरी पर जिम्मेदारी तय करने की मांग घटना ने व्यवस्था के सामने बड़ा सवाल खड़ा किया है कि इतनी कम उम्र की पीड़िता के मामले में मेडिकल जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में घंटों की देरी क्यों हुई। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में अस्पतालों के बीच बेहतर समन्वय होना चाहिए, ताकि पीड़ित परिवार को इधर-उधर भटकना न पड़े। अब लोग मेडिकल में हुई कथित देरी की जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
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चकिया। डेढ़ वर्ष की मासूम के साथ दुष्कर्म के आरोपित की गिरफ्तारी के बाद अब मेडिकल प्रक्रिया में कथित देरी ने स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित परिवार को रात करीब 11 बजे से अगले दिन दोपहर दो बजे के बाद तक मेडिकल के लिए चकिया से चंदौली और फिर चंदौली से चकिया के चक्कर लगाने पड़े। इससे परिजनों के साथ ही स्थानीय लोगों में भी आक्रोश बढ़ता गया।

बताया गया कि मासूम को मेडिकल के लिए जिला संयुक्त चिकित्सालय लाया गया, लेकिन बाद में उसे दोबारा चंदौली भेजे जाने की बात सामने आने पर लोग आक्रोशित हो गए। सभासद ज्योति गुप्ता, रवि गुप्ता, राजू वर्मा, मोहन वर्मा, शिवरतन गुप्ता, राजकिशोर, बुद्धू, प्रदीप गुप्ता, राजन गुप्ता और अनिल साहू समेत बड़ी संख्या में लोग अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंच गए। लोगों ने तत्काल सीएमएस को मौके पर बुलाने की मांग की।

मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएमएस मौके पर पहुंचे और परिजनों व लोगों की बात सुनी। इसके बाद ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक डॉ. रोमा को बुलाकर तत्काल मेडिकल परीक्षण कराने का निर्देश दिया। काफी प्रयास के बाद मासूम का मेडिकल परीक्षण कराय

मेडिकल में देरी की जानकारी मिलते ही क्षेत्रीय विधायक कैलाश आचार्य ने लखनऊ से ही मामले में हस्तक्षेप किया। उन्होंने सीएमएस, सीएमओ, थाना प्रभारी और पुलिस अधीक्षक से फोन पर वार्ता कर मासूम की मेडिकल प्रक्रिया तत्काल पूरी कराने के निर्देश दिए। प्रभारी मंत्री ने भी अधिकारियों से बात कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

व्यापार मंडल अध्यक्ष विष्णु जायसवाल के नेतृत्व में मनोज चौहान, अंकित समेत अन्य व्यापारियों ने भी पीड़ित परिवार के साथ खड़े होकर तत्काल मेडिकल और आरोपित के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की।

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देरी पर जिम्मेदारी तय करने की मांग

घटना ने व्यवस्था के सामने बड़ा सवाल खड़ा किया है कि इतनी कम उम्र की पीड़िता के मामले में मेडिकल जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में घंटों की देरी क्यों हुई। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में अस्पतालों के बीच बेहतर समन्वय होना चाहिए, ताकि पीड़ित परिवार को इधर-उधर भटकना न पड़े। अब लोग मेडिकल में हुई कथित देरी की जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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