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FCRA संशोधन विधेयक जेपीसी को भेजने का प्रस्ताव लोकसभा में पारित
31 सदस्यीय संयुक्त समिति करेगी विधेयक की समीक्षा, शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह के अंतिम दिन तक देगी रिपोर्ट
नई दिल्ली। विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक 2026 को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजने पर सहमति बन गई है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में इसे जेपीसी को भेजने का प्रस्ताव पेश किया, जिसे सदन ने पारित कर दिया।
लोकसभा से 21 और राज्यसभा से होंगे 10 सदस्य
प्रस्तावित जेपीसी में कुल 31 सदस्य होंगे। इनमें 21 सदस्य लोकसभा और 10 सदस्य राज्यसभा से मनोनीत किए जाएंगे। समिति को विधेयक के प्रावधानों की विस्तृत जांच करने की जिम्मेदारी दी गई है। समिति को 2026 के शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह के अंतिम दिन तक अपनी रिपोर्ट संसद को सौंपनी होगी।
विपक्ष ने विधेयक वापस लेने की मांग की
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने विधेयक का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि सरकार अल्पसंख्यकों और गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) को निशाना बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने सरकार से विधेयक वापस लेने की मांग की।
वहीं, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की ओर से ही विधेयक को जेपीसी के पास भेजने की मांग की गई थी। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष को विधेयक के किसी प्रावधान पर आपत्ति है तो वह जेपीसी के समक्ष अपनी बात रख सकता है।
रिजिजू बोले- किसी अल्पसंख्यक वर्ग को निशाना नहीं बनाया जा रहा
रिजिजू ने कहा कि विधेयक का उद्देश्य किसी अल्पसंख्यक वर्ग को निशाना बनाना नहीं है, बल्कि देश की सुरक्षा से जुड़े नियमों को मजबूत करना है। उन्होंने विपक्ष को जेपीसी में पर्याप्त समय मिलने की बात कही।
अखिलेश यादव ने भी जताया विरोध
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी एफसीआरए संशोधन विधेयक का विरोध किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस विधेयक के खिलाफ है और सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि उसके प्रस्तावित प्रावधानों का उद्देश्य क्या है।
