गाजीपुर
692 करोड़ की परियोजनाओं की सौगात, तीन बड़ी मांगों पर टिकी रहीं निगाहें
चीनी मिल, कताई मिल और विश्वविद्यालय पर घोषणा नहीं होने से लोगों में चर्चा
विकास परियोजनाओं का स्वागत, रोजगार और उच्च शिक्षा से जुड़ी लंबित मांगों पर सरकार से पहल की अपेक्षा
नंदगंज (गाजीपुर)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को मोहम्मदाबाद में आयोजित कार्यक्रम के दौरान गाजीपुर जनपद को लगभग 692 करोड़ रुपये की लागत वाली 268 विकास परियोजनाओं की सौगात दी। लोकार्पण और शिलान्यास की इन परियोजनाओं का जिलेभर में स्वागत किया गया, लेकिन लंबे समय से लंबित तीन प्रमुख मांगों—नंदगंज-सिहोरी चीनी मिल, बड़ौदा कताई मिल के पुनः संचालन तथा गाजीपुर में विश्वविद्यालय की स्थापना—पर कोई घोषणा नहीं होने से लोगों के बीच इसकी चर्चा भी रही।
बंद मिलों से प्रभावित है रोजगार
स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से बंद पड़ी नंदगंज-सिहोरी चीनी मिल और बड़ौदा कताई मिल के कारण हजारों लोगों का रोजगार प्रभावित हुआ है। रोजगार के सीमित अवसरों के चलते बड़ी संख्या में युवाओं को दूसरे जिलों और राज्यों में पलायन करना पड़ रहा है। लोगों का मानना है कि यदि इन औद्योगिक इकाइयों का संचालन दोबारा शुरू हो जाए तो स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
विश्वविद्यालय की मांग भी वर्षों से लंबित
गाजीपुर में विश्वविद्यालय की स्थापना की मांग भी लंबे समय से उठती रही है। वर्तमान में जिले के छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए वाराणसी, जौनपुर, बलिया सहित अन्य शहरों का रुख करना पड़ता है, जिससे उन्हें अतिरिक्त आर्थिक और शैक्षणिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। स्थानीय स्तर पर विश्वविद्यालय की स्थापना को शिक्षा के विकास के लिए आवश्यक कदम माना जा रहा है।
लंबित मांगों पर ठोस पहल की उम्मीद
मुख्यमंत्री द्वारा घोषित विकास परियोजनाओं का सामाजिक संगठनों, व्यापारिक वर्ग और नागरिकों ने स्वागत किया है। साथ ही उन्होंने सरकार से चीनी मिल और कताई मिल के पुनः संचालन तथा गाजीपुर में विश्वविद्यालय की स्थापना जैसी लंबित मांगों पर भी गंभीरता से विचार करने की अपेक्षा जताई है। उनका कहना है कि इन मुद्दों पर ठोस पहल होने से जिले में रोजगार, औद्योगिक विकास और उच्च शिक्षा को नई दिशा मिल सकती है।
