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वाराणसी

जंतर-मंतर घटनाक्रम की जांच की मांग, अधिवक्ताओं ने डीएम को सौंपा ज्ञापन

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नई दिल्ली में धरना-प्रदर्शन और संसद मार्च प्रकरण की निष्पक्ष जांच व दोषियों पर कार्रवाई की उठाई मांग

जिलाधिकारी के निर्देश पर एसीएम तृतीय ने प्राप्त किया ज्ञापन, नियमानुसार अग्रेषित करने का दिया आश्वासन

वाराणसी। राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में जंतर-मंतर पर आयोजित धरना-प्रदर्शन, संसद मार्च और उससे जुड़े घटनाक्रम की उच्च स्तरीय जांच तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की मांग को लेकर अधिवक्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन सौंपा। जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार के निर्देश पर एसीएम तृतीय विजय कुमार त्रिपाठी ने ज्ञापन प्राप्त किया और नियमानुसार संबंधित स्तर पर अग्रेषित किए जाने का आश्वासन दिया।

ज्ञापन में पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष, समयबद्ध और उच्च स्तरीय जांच कराने के साथ दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की मांग की गई।

भारतीय जनता पार्टी विधि प्रकोष्ठ, काशी क्षेत्र के संयोजक एवं दि बनारस बार एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने कहा कि वह 17 जुलाई 2026 से इस प्रकरण में विभिन्न सक्षम अधिकारियों को प्रार्थना-पत्र भेजकर आवश्यक विधिक कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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ज्ञापन में वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि दिल्ली में आयोजित प्रदर्शन के दौरान कुछ अराजक तत्वों ने प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास क्षेत्र और संसद की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देने का प्रयास किया। उन्होंने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कर आयोजकों, सहयोगियों और अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान कर उनके विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की मांग की।

राजस्व बार के संरक्षक जितेंद्र तिवारी ने कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की साजिश, विदेशी या अन्य अवैध वित्तीय सहयोग, डिजिटल समन्वय अथवा किसी अन्य विधि-विरुद्ध गतिविधि की भूमिका सामने आती है तो संबंधित व्यक्तियों एवं संगठनों के विरुद्ध भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

ज्ञापन सौंपने के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश त्रिवेदी, जितेंद्र तिवारी, आशुतोष शुक्ला, आशुतोष सक्सेना, मोनी श्रीवास्तव, दीपक वर्मा, गुलशन मिश्रा, सौरभ मिश्रा, सुजीत कुमार सिंह पटेल सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि लोकतंत्र, संविधान की गरिमा और राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि है तथा किसी भी प्रकार की हिंसा या संवैधानिक संस्थाओं की सुरक्षा को चुनौती देने वाले कृत्यों के प्रति कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

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