वाराणसी
वाराणसी में बनेगा ‘आनंद कानन कला गुरुकुल’, गुरु-शिष्य परंपरा के साथ मिलेगा संगीत, नृत्य और चित्रकला का प्रशिक्षण
वाराणसी। काशी की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान देने की दिशा में वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। रविदास पार्क स्थित आनंद कानन परिसर में ‘आनंद कानन कला गुरुकुल’ की स्थापना की जा रही है। यह गुरुकुल केवल कला प्रशिक्षण का केंद्र नहीं होगा, बल्कि भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा को आधुनिक स्वरूप में पुनर्जीवित करने वाला एक समग्र सांस्कृतिक संस्थान बनेगा।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य काशी की प्राचीन कला परंपराओं का संरक्षण, संवर्धन और नई पीढ़ी तक उनका प्रभावी हस्तांतरण करना है। यहां शास्त्रीय संगीत, उपशास्त्रीय संगीत, कथक, लोकनृत्य, भारतीय वाद्ययंत्रों का वादन तथा चित्रकला सहित विभिन्न विधाओं का व्यवस्थित प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
गुरु-शिष्य परंपरा को मिलेगा नया विस्तार
आनंद कानन कला गुरुकुल की सबसे बड़ी विशेषता इसकी शिक्षा प्रणाली होगी, जो भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा पर आधारित रहेगी। यहां विद्यार्थियों को केवल तकनीकी प्रशिक्षण ही नहीं, बल्कि कला के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों से भी परिचित कराया जाएगा। अनुभवी गुरु पारंपरिक शैली में शिष्यों को प्रशिक्षण देंगे, जिससे काशी की सांस्कृतिक धरोहर को नई पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सके।
वैदिक गुरुकुल की अवधारणा पर होगा निर्माण
प्रस्तावित गुरुकुल का निर्माण वैदिक गुरुकुल ग्राम की अवधारणा के अनुरूप किया जाएगा। परिसर में प्राकृतिक वातावरण, भारतीय स्थापत्य शैली और आध्यात्मिक परिवेश का विशेष ध्यान रखा जाएगा। गंगा तट के निकट स्थित यह केंद्र कलाकारों और विद्यार्थियों को शांत, प्रेरणादायक और साधना के अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराएगा।
परियोजना के तहत अभ्यास कक्ष, संगीत एवं नृत्य प्रशिक्षण केंद्र, चित्रकला स्टूडियो, खुले मंच, सांस्कृतिक आयोजन स्थल तथा पारंपरिक वास्तुकला से युक्त भवन विकसित किए जाएंगे।
वीडीए की पहल, विशेषज्ञों का सहयोग
इस परियोजना को मूर्त रूप देने में वाराणसी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। गुरुकुल की सांस्कृतिक एवं स्थापत्य परिकल्पना प्रख्यात कलाकार मनीष खत्री ने तैयार की है।
इसके अलावा सुबह-ए-बनारस से जुड़े रत्नेश वर्मा तथा शहर के वरिष्ठ संगीतज्ञों, नृत्याचार्यों, चित्रकारों और कला गुरुओं के सहयोग से परियोजना को अंतिम रूप दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केंद्र भविष्य में काशी की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा।
कलाकारों और विद्यार्थियों के लिए बनेगा बड़ा मंच
आनंद कानन कला गुरुकुल में स्थानीय कलाकारों के साथ-साथ देश-विदेश से आने वाले कला साधकों को भी प्रशिक्षण और अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। यहां समय-समय पर संगीत समारोह, नृत्य उत्सव, कला प्रदर्शनियां, कार्यशालाएं और सांस्कृतिक संवाद आयोजित किए जाएंगे, जिससे काशी की जीवंत सांस्कृतिक परंपराओं को नई ऊर्जा मिलेगी।
काशी की सांस्कृतिक विरासत को मिलेगा नया आयाम
धार्मिक और सांस्कृतिक राजधानी के रूप में विख्यात काशी सदियों से संगीत, नृत्य, साहित्य और ललित कलाओं का प्रमुख केंद्र रही है। ऐसे में आनंद कानन कला गुरुकुल की स्थापना इस विरासत को संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। यह गुरुकुल भविष्य में काशी को कला शिक्षा, सांस्कृतिक साधना और भारतीय परंपराओं के राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय केंद्र के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाएगा।
