वाराणसी
रामनगर रामलीला 2026 की तैयारियां शुरू, 18 जुलाई को होगा पात्र चयन
25 सितंबर से रावण जन्म के साथ शुभारंभ
वाराणसी। विश्व प्रसिद्ध रामनगर रामलीला के वर्ष 2026 संस्करण की तैयारियां शुरू हो गई हैं। काशीराज परिवार ने रामलीला के प्रथम चरण के तहत भगवान श्रीराम सहित प्रमुख पात्रों के चयन की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। इसके लिए वाराणसी, मिर्जापुर, चंदौली और गाजीपुर के करीब तीन दर्जन मठों को सूचना भेजकर योग्य बालकों को चयन प्रक्रिया में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है।
रामनगर की ऐतिहासिक रामलीला भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और धार्मिक आस्था का अद्भुत संगम मानी जाती है। करीब दो शताब्दियों से चली आ रही इस रामलीला को देखने के लिए हर वर्ष देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। यही कारण है कि पात्रों का चयन पूरी पारंपरिक विधि और गंभीरता के साथ किया जाता है।

18 जुलाई को होगा पात्रों का चयन
काशीराज परिवार की ओर से 18 जुलाई को पात्र चयन की तिथि निर्धारित की गई है। चयन प्रक्रिया रामनगर किला स्थित जवाहरखाना में आयोजित होगी, जहां 8 से 14 वर्ष आयु वर्ग के बालकों की परीक्षा ली जाएगी।
चयन के दौरान प्रतिभागियों से संस्कृत के श्लोक एवं श्रीरामचरितमानस की चौपाइयों का शुद्ध और स्पष्ट उच्चारण कराया जाएगा। इसके साथ ही उनकी आवाज की मधुरता, भाव-भंगिमा, मंचीय प्रस्तुति और अभिनय क्षमता का भी परीक्षण किया जाएगा।
इन पांच प्रमुख पात्रों का होगा चयन
रामनगर रामलीला के लिए पांच प्रमुख पात्रों का चयन किया जाएगा—
- भगवान श्रीराम
- माता सीता
- लक्ष्मण
- भरत
- शत्रुघ्न
इन पात्रों का चयन परंपरागत रीति-रिवाजों के अनुसार किया जाता है और चयनित बालक पूरी रामलीला के केंद्र में रहते हैं।
कई जिलों के मठों को भेजा गया आमंत्रण
काशीराज परिवार ने वाराणसी के सिगरा, चितईपुर, मैदागिन, सोनिया, लक्सा, चौखंभा और लंका क्षेत्र के मठों के अलावा मिर्जापुर के चुनार, नारायणपुर और विशेषपुर, चंदौली के मुगलसराय, गोधना और मारूफपुर तथा गाजीपुर के जमानिया सहित लगभग तीन दर्जन मठों को सूचना भेजी है। इन मठों से पूर्व वर्षों में भी कई बालकों का चयन प्रमुख पात्रों के रूप में होता रहा है।
दो अगस्त को प्रथम गणेश पूजन
रामलीला की परंपरा के अनुसार 2 अगस्त को प्रथम गणेश पूजन होगा, जबकि 14 सितंबर को द्वितीय गणेश पूजन संपन्न कराया जाएगा। इसके बाद 25 सितंबर को रावण जन्म प्रसंग के मंचन के साथ विश्व प्रसिद्ध रामनगर रामलीला का विधिवत शुभारंभ होगा।
चयनित पात्रों को मिलेगा 45 दिन का विशेष प्रशिक्षण
प्रथम गणेश पूजन के बाद चयनित पात्रों को गंगा तट स्थित बलुआ घाट धर्मशाला में लगभग 45 दिनों का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस दौरान उन्हें संवाद अदायगी, भाव-भंगिमा, स्वर की स्पष्टता, मंच संचालन, शारीरिक मुद्राओं और धार्मिक मर्यादाओं का अभ्यास कराया जाएगा, ताकि वे मंचन के दौरान अपने पात्रों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर सकें।
विश्वभर में है रामनगर रामलीला की पहचान
करीब 200 वर्ष से अधिक पुरानी रामनगर रामलीला अपनी पारंपरिक शैली, भव्य मंचन और धार्मिक अनुशासन के कारण विश्वभर में प्रसिद्ध है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि पूरी रामलीला प्राकृतिक स्थलों पर वास्तविक परिवेश में मंचित की जाती है, जिससे दर्शकों को त्रेतायुग का सजीव अनुभव होता है। यही वजह है कि हर वर्ष हजारों श्रद्धालु और पर्यटक इस अद्वितीय सांस्कृतिक धरोहर के दर्शन के लिए रामनगर पहुंचते हैं।
