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गोरखपुर

डॉ. लालजी सिंह के जन्मदिन पर ‘द डीएनए वॉरियर’ कॉमिक्स का लोकार्पण

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पद्मश्री डॉ. के. थंगराज ने किया विमोचन, कॉमिक्स के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचेगी भारत के डीएनए फिंगरप्रिंटिंग के जनक की प्रेरक गाथा

वाराणसी। भारत में डीएनए फिंगरप्रिंटिंग तकनीक के जनक, आधुनिक फोरेंसिक विज्ञान के शिल्पकार एवं पद्मश्री डॉ. लालजी सिंह के जन्मदिन के अवसर पर उनकी जीवन यात्रा पर आधारित सचित्र कॉमिक्स ‘द डीएनए वॉरियर: डॉ. लालजी सिंह – ए लाइफ अनलॉकिंग इंडियाज जेनेटिक सीक्रेट्स’ का भव्य लोकार्पण किया गया। 28 पृष्ठों की इस इलस्ट्रेटेड कॉमिक्स का विमोचन पद्मश्री डॉ. के. थंगराज ने किया।

यह कॉमिक्स पहली बार डॉ. लालजी सिंह के संघर्ष, वैज्ञानिक उपलब्धियों, राष्ट्रसेवा और सामाजिक योगदान को सरल एवं चित्रात्मक शैली में आमजन, विशेषकर बच्चों और युवाओं तक पहुंचाने का प्रयास है। इस परियोजना की परिकल्पना काशी हिंदू विश्वविद्यालय के जीन विज्ञानी प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे और डॉ. चंदना बसु ने की है।

डॉ. लालजी सिंह का जन्म वर्ष 1947 में जौनपुर जिले के कलवारी गांव में हुआ था। उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से शोधकार्य पूरा करने के बाद एडिनबर्ग में बीकेएम सैटेलाइट डीएनए की खोज की। उनके योगदान से भारत डीएनए फिंगरप्रिंटिंग तकनीक विकसित करने वाला दुनिया का तीसरा देश बना। उन्होंने प्रेमानंद प्रकरण में डीएनए साक्ष्य के माध्यम से न्यायिक प्रक्रिया को नई दिशा दी तथा सीसीएमबी, सीडीएफडी, जीनोम फाउंडेशन और एडनेट जैसी संस्थाओं के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे बीएचयू के 25वें कुलपति भी रहे।

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लोकार्पण समारोह में पद्मश्री डॉ. के. थंगराज ने कहा कि डॉ. लालजी सिंह की वैज्ञानिक विरासत को कॉमिक्स जैसे लोकप्रिय माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाना अत्यंत सराहनीय पहल है। प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे और डॉ. चंदना बसु ने बताया कि विज्ञान को प्रयोगशालाओं से निकालकर आम लोगों तक पहुंचाने के उद्देश्य से इस माध्यम का चयन किया गया।

कॉमिक्स की कहानी और स्क्रिप्ट डॉ. वैष्णवी श्रीधर ने तैयार की है, जबकि चित्रांकन इंजी. नंदिनी चिलकम ने किया। डिजिटल आर्ट का कार्य अभिषेक रामानुजम ने किया तथा कंटेंट का वैज्ञानिक परीक्षण डॉ. पंकज श्रीवास्तव, डॉ. आशीष सिंह, डॉ. गरिमा जैन, डॉ. त्रिपुरा चतुर्वेदुला और पूजा रानी ने किया।

कॉमिक्स में डॉ. लालजी सिंह के बचपन, बीएचयू में शोध, एडिनबर्ग की ऐतिहासिक खोज, सीसीएमबी में वैज्ञानिक संघर्ष, डीएनए फिंगरप्रिंटिंग की सफलता, प्रेमानंद मामले में ऐतिहासिक भूमिका, संस्थानों की स्थापना और शिक्षा जगत में उनके योगदान को सरल भाषा और आकर्षक चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।

एडनेट सोसाइटी के अध्यक्ष प्रो. सतीश कुमार ने इसे डॉ. लालजी सिंह को सच्ची श्रद्धांजलि बताते हुए कहा कि यह कॉमिक्स विज्ञान संचार के क्षेत्र में नई दिशा देगी। वहीं डॉ. लालजी सिंह सेंटर, जौनपुर के निदेशक डॉ. आशीष सिंह ने कहा कि यह कृति आने वाली पीढ़ियों को विज्ञान, संघर्ष, न्याय और राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करेगी।

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आयोजकों के अनुसार इस कॉमिक्स का हिंदी सहित तमिल, तेलुगु, बांग्ला, मराठी, कन्नड़, मलयालम, गुजराती, पंजाबी समेत विभिन्न भारतीय भाषाओं में भी जल्द प्रकाशन किया जाएगा, ताकि देश के हर राज्य और हर स्कूल तक डॉ. लालजी सिंह की प्रेरणादायक जीवनगाथा पहुंच सके।

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