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वाराणसी

गंगा में हाइड्रोजन फ्यूल सेल पोत का अधिकारियों ने किया निरीक्षण

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वाराणसी। भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण ने वाराणसी में हाइड्रोजन फ्यूल सेल से संचालित पोत का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान प्राधिकरण के उपाध्यक्ष सुनील कुमार सिंह और सदस्य (तकनीकी) कमोडोर श्रीराज शिंदे मौजूद रहे। अधिकारियों ने पोत पर चालक दल और तकनीकी टीम से बातचीत कर उनके अनुभवों को जाना तथा सामने आ रही समस्याओं को करीब से समझते हुए समाधान का भरोसा दिया।

अधिकारियों ने वाराणसी में तैनात हाइड्रोजन फ्यूल सेल पोत का अवलोकन किया। साथ ही सीएनजी से संचालित नौका संचालकों के साथ परिचालन से जुड़े मुद्दों और चुनौतियों पर चर्चा की गई। इस दौरान संचालन में आने वाली दिक्कतों के समाधान की संभावनाओं पर भी मंथन हुआ।

गंगा में ग्रीन एनर्जी आधारित नौका और जलयान संचालन शुरू करने का उद्देश्य ध्वनि प्रदूषण और वायु प्रदूषण को कम करना है। इसी दिशा में गंगा में नौकाओं के संचालन के लिए सीएनजी के साथ हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ जल परिवहन क्षेत्र को नई दिशा देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

सरकार की पहल के तहत वाटर मेट्रो और क्रूज संचालन भी इसी प्रकार किया जा रहा है। इसके लिए निरीक्षण और तैयारियों की प्रक्रिया लगातार जारी है, ताकि सभी व्यवस्थाओं को परखा जा सके। सावन माह शुरू होने के साथ काशी में पर्यटकों की संख्या बढ़ने की संभावना है, जिससे गंगा में नौकाओं पर भी भीड़ बढ़ सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण की टीम काशी में सक्रिय होकर व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने में जुटी है।

भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण के आधिकारिक एकाउंट पर सोमवार को इस संबंध में जानकारी साझा की गई। प्राधिकरण के अनुसार यह पहल जल परिवहन को अधिक सुगम बनाने के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी। हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक को जल परिवहन क्षेत्र में नई क्रांति लाने वाला कदम माना जा रहा है, जिससे गंगा नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखने में भी मदद मिलेगी।

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वाराणसी में हाइड्रोजन फ्यूल सेल पोत का निरीक्षण और सीएनजी संचालकों के साथ हुई चर्चा को जल परिवहन क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। यह पहल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी को भी दर्शाती है। भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण की यह पहल वाराणसी में जल परिवहन को नई दिशा देने के साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी अहम कदम साबित हो सकती है।

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