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वाराणसी

जनगणना में सही जानकारी देने से कतरा रहे लोग, शिक्षकों के सामने बढ़ीं चुनौतियां

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वाराणसी। जनगणना कार्य में लगे शिक्षकों को भले ही लोगों से जानकारी लेने के लिए प्रशिक्षित किया गया हो, लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि उन्हें खुद लोगों के कई सवालों का सामना करना पड़ रहा है। लोग शिक्षकों से पूछ रहे हैं कि जनगणना कराने का उद्देश्य क्या है, इससे क्या लाभ होगा, कहीं संपत्ति का विवरण देने के बाद सरकार टैक्स तो नहीं बढ़ा देगी, कार या अनाज संबंधी जानकारी का क्या उपयोग किया जाएगा। ऐसे तमाम सवालों के बीच शिक्षकों को जनगणना का कार्य करना पड़ रहा है। शिक्षकों का कहना है कि लोग घर में मौजूद कार, किरायेदार, टीवी, एसी, अनाज आदि की जानकारी देने में हिचकिचा रहे हैं।

वाराणसी में जनगणना के लिए माध्यमिक और बेसिक शिक्षा विभाग के लगभग 7500 शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है। तेज धूप और बढ़ते तापमान को देखते हुए शिक्षक सुबह और शाम के समय घर-घर जाकर जनगणना कर रहे हैं। शिक्षिका छवि अग्रवाल ने बताया कि घरों पर पहुंचने पर दो तरह के लोग मिल रहे हैं। एक वे, जो बिना किसी सवाल के जानकारी दे देते हैं, जबकि दूसरे ऐसे हैं जो 33 सवालों के जवाब देने से पहले शिक्षकों से ही उससे अधिक सवाल पूछने लगते हैं। काफी समझाने के बावजूद कई लोग संतुष्ट नहीं होते और सही जानकारी देने से बचते हैं।

शिक्षिका अनुराधा पांडेय ने बताया कि लोगों के मन में यह आशंका है कि कहीं सरकार टैक्स न बढ़ा दे। कुछ लोगों को यह भी डर है कि जानकारी देने के बाद उनका राशन कार्ड रद्द न कर दिया जाए। शिक्षिका मीनाक्षी पांडेय ने बताया कि जिन परिवारों में 10 सदस्य हैं, वहां कई लोग केवल चार सदस्यों का ही विवरण दे रहे हैं। पड़ोसियों से जानकारी मिलने के बाद दोबारा समझाकर सही जानकारी दर्ज करानी पड़ रही है।

आमतौर पर लोग घर के बाहर खड़ी कार को किसी अन्य व्यक्ति की बताने लगते हैं। वहीं टीवी, फ्रिज, एसी और कूलर जैसी वस्तुओं की जानकारी देने से भी इन्कार कर रहे हैं। अनाज, शौचालय और पानी से जुड़े सवाल पूछने पर कुछ लोग नाराजगी भी जाहिर करते हैं। शिक्षिका प्रिया गोयल ने बताया कि लोगों में जनगणना को लेकर पर्याप्त जागरूकता नहीं है। ऐसे में क्षेत्रीय प्रधान या पार्षद का सहयोग लेना पड़ रहा है। जनप्रतिनिधियों की मदद से कार्य अपेक्षाकृत आसान हो जाता है।

भवन किसके नाम पर, सामान और अनाज की जानकारी क्यों मांगी जा रही?

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शिक्षकों का कहना है कि अधिकांश लोगों को केवल इतना पता है कि भवनों की गणना की जा रही है। उन्हें यह जानकारी नहीं है कि गणना के लिए आने वाला कर्मचारी सॉफ्टवेयर में दर्ज 33 सवाल भी पूछेगा। जानकारी के अभाव में लोग सवाल कर रहे हैं कि जब भवनों की गणना हो रही है तो अनाज, शौचालय, टीवी और मोबाइल की जानकारी क्यों ली जा रही है। शिक्षकों का कहना है कि जनगणना को लेकर और व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए।

बिना सूचना बढ़ाया जा रहा एचएलबी

शिक्षकों ने बताया कि बिना किसी कर्मचारी को पूर्व जानकारी दिए उसका एचएलबी (हाउस लिस्टिंग ब्लॉक) बढ़ाया जा रहा है। कर्मचारियों को इसकी जानकारी तब मिलती है जब उनके मोबाइल पर संदेश प्राप्त होता है। इससे कार्य का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।

शिक्षक नेताओं की नहीं लगी ड्यूटी, कुछ ने बाद में कटवाई

ड्यूटी कर रहे शिक्षकों का आरोप है कि जनगणना ड्यूटी लगाने में पक्षपात किया गया है। उनका कहना है कि शिक्षक नेताओं को इस कार्य से अलग रखा गया, जबकि नियमानुसार सभी की ड्यूटी लगनी चाहिए थी। वहीं कुछ लोगों ने पैरवी कर अपना नाम ड्यूटी सूची से हटवा लिया। इसका असर अन्य कर्मचारियों पर एचएलबी बढ़ने के रूप में पड़ रहा है।

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अर्जित अवकाश देने की मांग

शिक्षकों ने जनगणना ड्यूटी के बदले अर्जित अवकाश दिए जाने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि गर्मी की छुट्टियों में ही शिक्षकों को अपने निजी कार्य निपटाने और परिवार के साथ समय बिताने का अवसर मिलता है, लेकिन जनगणना कार्य के कारण उन्हें अवकाश का लाभ नहीं मिल पा रहा है। शिक्षकों ने दिल्ली और मध्यप्रदेश की तर्ज पर यहां भी अर्जित अवकाश दिए जाने की मांग की है।

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