वाराणसी
संदीप और महेश्वर को मिलेगा नया जीवन
आरबीएसके करायेगा उनके दिल का इलाज
स्वास्थ्य विभाग ने किया अलीगढ़ मेडीकल कॉलेज रेफर
वाराणसी। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) जन्म से किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित बच्चों के स्वास्थ्य और उनेक उपचार में वरदान साबित हो रहा है। हृदय रोग (कंजीनाइटिल हार्ट डिजीज-सीएचडी) से ग्रसित संदीप (11 वर्ष) व महेश्वर ( 3 वर्ष) के निःशुल्क उपचार का रास्ता अब आरबीएसके के जरिये साफ हो चुका है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ संदीप चौधरी ने बताया कि दोनों बच्चों को हृदय रोग के इलाज के लिए चिन्हित अलीगढ़ मेडीकल कॉलेज रेफर कर दिया गया है । दोनों बच्चों का जल्द ही निःशुल्क इलाज किया जाएगा।
सीएमओ ने बताया कि जन्म से किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित बच्चों के स्वास्थ्य और उनेक उपचार के उद्देश्य से जनपद में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) पर पूरा जोर दिया जा रहा है । आरबीएसके कार्यक्रम के अंतर्गत 40 बीमारियों व जन्मजात विकृतियों के लिए निःशुल्क इलाज के लिए शासन की ओर से अलीगढ़ मेडीकल कॉलेज में निःशुल्क आपरेशन का सुविधा प्रदान की जा रही है। उन्होने बताया कि संदीप और महेश्वर दोनों ही बेहद गरीब परिवार से सम्बन्धित है। उनके परिवारों के पास इतना धन नहीं है कि किसी बड़े में अस्पताल में इन बच्चों का इलाज करा सकें। उन्होने बताया कि आरबीएसके के अंतर्गत जनपद में ग्रामीण क्षेत्रों में 16 टीमें कार्यरत हैं जो प्रत्येक गाँव में विजिट कर जन्मजात दोषों की पहचान करती हैं एवं उनके उपचार के लिए प्रयास करती है ।
आरबीएसके के नोडल अधिकारी व एसीएमओ डॉ एके मौर्य ने बताया कि कुछ दिन पूर्व आरबीएसके टीम ने प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पिण्डरा व सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र चोलापुर में बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। इस दौरान कादीपुर निवासी रमेश कुमार सोनकर का तीन वर्षीय पुत्र महेश्वर व कृष्णापुर कला, रामपुर-हथवारी निवासी सुजीत कुमार पटेल का 11 वर्षीय पुत्र संदीप के अंदर अंदर सीएचडी के लक्षण देखें । परिजनों से बातचीत कर पता चला कि बहुत दिनों से बीमारी को लेकर परेशान थे । लेकिन आर्थिक तंगी के कारण वह उनका उपचार नहीं करा पा रहे थे । दोनों को पंडित दीनदयाल उपाध्याय चिकित्सालय जांच के लिए भेजा गया । जांच में हृदय रोग की बीमारी की पुष्टि हुई और दोनों को इलाज के लिए चिन्हित किया गया । इसके बाद सीएचडी के लिए चिन्हित अलीगढ़ मेडीकल कॉलेज से निःशुल्क इलाज के लिए अनुमति ली गयी । समस्त कार्रवाई करते हुये दोनों बच्चों को निःशुल्क इलाज के लिए अलीगढ़ मेडीकल कॉलेज रेफर कर दिया गया है । अगले कुछ दिनों में संदीप और महेश्वर का निःशुल्क इलाज होगा । उन्होने बताया कि जन्मजात दोषों में सीएचडी हृदय की एक गंभीर जन्मजात दोष है । सामान्यतः इसके उपचार में चार से पाँच लाख रुपये का खर्च लगता है, जोकि आरबीएसके योजना के अंतर्गत निःशुल्क इलाज किया जाता है । इस साल अभी तक सीएचडी के 9 बच्चे चिन्हित किए गए, जिसमें से 3 बच्चों का इलाज हो चुका है शेष बच्चों का जल्द ही निःशुल्क इलाज होगा ।
*सीएचडी के लक्षण-*
डॉ मौर्य ने बताया कि सीएचडी में प्रायः बच्चों में सबसे सामान्य लक्षण हाथ, पैर, जीभ का नीला पड़ जाना, ठीक तरह से सांस न ले पाना और माँ का दूध ठीक तरह से नहीं पी पाना एवं खेल-कूद में जल्दी थक जाना दिखते हैं । इस जन्मजात दोषों से बच्चों को बचाने के लिए गर्भावस्था के प्रारम्भ से तीन माह तक फोलिक एसिड एवं चौथे माह की शुरुआत से प्रतिदिन आयरन एवं फोलिक एसिड की एक-एक लाल गोली खिलाई जानी चाहिए। यदि गर्भवती में खून की कमी (एनीमिया) है तो उसको प्रतिदिन आयरन की दो लाल गोली खानी चाहिए।
