मिर्ज़ापुर
भागवत कथा के आयोजन से मिलता है अश्वमेध यज्ञ के बराबर फल
कथा श्रवण से जीव का कल्याण और पितरों को मिलती है शांति : पं. विष्णु शंकर
नरायनपुर, मीरजापुर। बैकुंठपुर में मंगलवार से सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। प्रथम दिन वाराणसी से आए भागवत कथा मर्मज्ञ पं. विष्णु शंकर महाराज ने कथा की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि भागवत कथा का श्रवण करने से जीव का परम कल्याण होता है और उसे भवसागर से पार होकर मोक्ष की प्राप्ति होती है।
भागवत कथा का बताया महत्व
पं. विष्णु शंकर महाराज ने कहा कि भागवत कथा का आयोजन कराने से अश्वमेध यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है। उन्होंने बताया कि ब्रह्मा ने कहा है कि यदि तराजू के एक पलड़े में श्रीमद्भागवत कथा और दूसरे में अमृत कलश रखा जाए तो भी भागवत कथा का पलड़ा भारी रहेगा।
भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का प्रसंग
कथा व्यास ने भक्ति के पुत्र ज्ञान और वैराग्य तथा कलियुग के आगमन एवं उसके प्रभाव का विस्तार से वर्णन किया। सनकादिक और नारद प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि तपस्या, योग और समाधि से जो फल प्राप्त करना कठिन है, वह श्रद्धापूर्वक भागवत कथा सुनने से प्राप्त हो सकता है।
धुंधकारी को कथा श्रवण से मिली मुक्ति
आत्मदेव, उनकी पत्नी धुंधली तथा पुत्र गोकर्ण और धुंधकारी का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि गया में पिंडदान और श्राद्ध के बाद भी धुंधकारी को मुक्ति और संतुष्टि नहीं मिली। भागवत कथा का श्रवण करने के बाद उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई। उन्होंने कथा श्रवण को आत्मिक शांति और सद्मार्ग का माध्यम बताया।
विधि-विधान से हुआ संकल्प
कथा से पूर्व पुरोहित अजय पाठक ने यजमान एडवोकेट प्रेम जायसवाल को विधि-विधान से श्रीमद्भागवत कथा के आयोजन एवं श्रवण का संकल्प दिलाया। प्रथम दिवस कथा के समापन पर आरती की गई और श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया।
इस अवसर पर मंगला प्रसाद जायसवाल, महेश जायसवाल, दिनेश, विजय जायसवाल, दिलीप जायसवाल, राजकुमारी जायसवाल, सुभाष, अजीत, अशोक, आशीष सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
