वाराणसी
जानलेवा हमला और गैंगस्टर मामले में तीन आरोपित दोषमुक्त
कोर्ट ने साक्ष्य व गवाहों के बयान के आधार पर संदेह का लाभ देकर सुनाया फैसला
वाराणसी। जानलेवा हमला और गैंगस्टर एक्ट के मामले में तीन आरोपितों को अदालत से बड़ी राहत मिली है। विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट) सुशील कुमार खरवार की अदालत ने कोदई चौकी, दशाश्वमेध निवासी भोलू, नायाब और मुकेश कुमार सिन्हा को आरोप सिद्ध न होने पर संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। अदालत में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव, बृजपाल सिंह यादव ‘गुड्डू’, आनंद तिवारी पंकज और नरेश यादव ने पक्ष रखा।
2002 में महिला पर गोली चलाने का था आरोप
अभियोजन पक्ष के अनुसार वादिनी जहांआरा ने दशाश्वमेध थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि 8 जुलाई 2002 की रात करीब साढ़े नौ बजे वह अपने घर से लगभग दस कदम दूर मैदान में अपनी नौ वर्षीय बच्ची के साथ बैठी थीं। इसी दौरान पीछे से किसी ने उन्हें गोली मार दी। गोली लगते ही वह बेहोश होकर वहीं गिर पड़ीं। घटना की सूचना पर पहुंची पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की।
विवेचना में तीनों के नाम आए सामने
पुलिस की विवेचना के दौरान इस मामले में भोलू, नायाब और मुकेश कुमार सिन्हा के नाम प्रकाश में आए। इसके बाद पुलिस ने मामले में आगे की जांच की। अभियोजन के अनुसार पुलिस की छानबीन में तीनों आरोपितों के एक संगठित गिरोह से जुड़े होने की बात सामने आई।
गिरोह पर कई आपराधिक मामलों का आरोप
अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपितों पर अपने और गिरोह के सदस्यों के आर्थिक एवं भौतिक लाभ के लिए हत्या के प्रयास, लूट और छिनौती समेत विभिन्न आपराधिक मामलों में शामिल होने के आरोप थे। इन तथ्यों के आधार पर पुलिस ने तीनों के खिलाफ जानलेवा हमला और गैंगस्टर एक्ट समेत विभिन्न धाराओं में दशाश्वमेध थाने में मुकदमा दर्ज किया था।
साक्ष्य के आधार पर मिला संदेह का लाभ
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने गवाहों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन किया। विचारण के बाद आरोप सिद्ध नहीं होने पर अदालत ने तीनों आरोपितों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। फैसले के बाद मामले में आरोपितों को बड़ी कानूनी राहत मिली।
