गाजीपुर
चेहल्लुम की तैयारियों में जुटा मुस्लिम समाज, कर्बला और चौकों की सजावट शुरू
अंजुमनों की नौहा ख्वानी और मजलिसों की तैयारियां तेज, सुरक्षा व्यवस्था पर भी नजर
इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों की याद में मनाया जाएगा चेहल्लुम
बहरियाबाद (गाजीपुर)। चेहल्लुम पर्व को लेकर बहरियाबाद और आसपास के मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में तैयारियां तेज हो गई हैं। कर्बला के मैदान और प्रमुख चौकों को सजाया जा रहा है। कई स्थानों पर अंजुमनों को आमंत्रित कर नौहा ख्वानी और मजलिसों के आयोजन की तैयारियां की जा रही हैं।
इमाम हुसैन की शहादत की याद में मनाया जाता है चेहल्लुम
चेहल्लुम, जिसे अरबी में अरबईन कहा जाता है, इस्लामिक कैलेंडर का एक प्रमुख भावनात्मक शोक दिवस है। फारसी भाषा में चेहल्लुम का अर्थ चालीसवां दिन होता है। यह मुहर्रम की 10 तारीख (आशूरा) के 40 दिन बाद यानी सफर महीने की 20 तारीख को मनाया जाता है।

यह दिन पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन और कर्बला के मैदान में शहीद हुए उनके 72 साथियों की याद में मनाया जाता है।
कर्बला की घटना को किया जाता है याद
मान्यता के अनुसार वर्ष 680 ईस्वी (61 हिजरी) में कर्बला की जंग में इमाम हुसैन ने अन्याय और अत्याचार के खिलाफ संघर्ष करते हुए शहादत दी थी। चेहल्लुम के अवसर पर दुनिया भर में मुस्लिम समुदाय इमाम हुसैन की कुर्बानी और उनके संदेश को याद करता है।
मजलिस और मातमी कार्यक्रमों की तैयारी
चेहल्लुम के दिन कई स्थानों पर काले लिबास पहनकर मातमी जुलूस निकाले जाते हैं, जिनमें ताजिया और अलम शामिल होते हैं। मस्जिदों और इमामबाड़ों में मजलिस आयोजित की जाती हैं, जहां कर्बला के घटनाक्रम और हजरत जैनब के धैर्य एवं संघर्ष का वर्णन किया जाता है।
इस दौरान नौहा ख्वानी, सीना-जनी (मातम) और श्रद्धापूर्वक याद के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। कई जगहों पर श्रद्धालुओं के लिए पानी, चाय और नज्र-ओ-नियाज की व्यवस्था भी की जाती है।
सच्चाई और इंसानियत का संदेश
समाज के लोगों का कहना है कि चेहल्लुम केवल शोक का अवसर नहीं, बल्कि सत्य, इंसानियत और न्याय के मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराने का दिन भी है। तैयारियों को लेकर स्थानीय स्तर पर लोगों में उत्साह और श्रद्धा का माहौल बना हुआ है।
