मिर्ज़ापुर
प्रेमचंद जयंती पर ‘ईदगाह’ का भावपूर्ण मंचन
बच्चों को दिया संवेदना और जिम्मेदारी का संदेश
डॉ. भवदेव पाण्डेय फाउंडेशन में मनाई गई कथासम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती, हामिद और अमीना के किरदार ने जीता दिल
मिर्जापुर। कथासम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर शुक्रवार को नगर के तिवराने टोला स्थित डॉ. भवदेव पाण्डेय फाउंडेशन में साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रेमचंद की अमर कहानी ‘ईदगाह’ के संवेदनशील प्रसंग का मंचन किया गया, जिसने उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया। कार्यक्रम में बच्चों को सत्य, संवेदना, त्याग और पारिवारिक जिम्मेदारी का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुंशी प्रेमचंद के चित्र पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इसके बाद उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए वक्ताओं ने कहा कि प्रेमचंद ने अपनी लेखनी के माध्यम से समाज में व्याप्त अन्याय, शोषण और विषमता के खिलाफ आवाज बुलंद की तथा साहित्य को सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम बनाया।
कार्यक्रम में सलिल पाण्डेय ने प्रेमचंद के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उनका जन्म वाराणसी के लमही गांव में हुआ था। उन्होंने चुनार में रहते हुए समाज की अनेक विसंगतियों और ब्रिटिश शासन के अत्याचारों को करीब से देखा, जिसका प्रभाव उनकी कहानियों और उपन्यासों में स्पष्ट दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य आज भी समाज को नई दिशा देने का कार्य कर रहा है।
‘ईदगाह’ कहानी के मंचन में छोटे बालक हामिद द्वारा अपनी इच्छाओं का त्याग कर अपनी बूढ़ी दादी के लिए चिमटा खरीदने की मार्मिक प्रस्तुति ने सभी को भावुक कर दिया। मंचन के माध्यम से त्याग, सेवा, पारिवारिक उत्तरदायित्व और संवेदनशीलता का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में अनन्या वर्मा त्रिपाठी ने बूढ़ी काकी (अमीना) तथा जैद ने हामिद की भूमिका निभाकर दर्शकों की खूब सराहना बटोरी।
इस अवसर पर गुड मॉर्निंग स्कूल की प्रधानाचार्य सावित्री पाण्डेय ने प्रेमचंद के जीवन और साहित्य पर प्रकाश डालते हुए बच्चों से सत्य, ईमानदारी और नैतिक मूल्यों के मार्ग पर चलने का आह्वान किया। कार्यक्रम में अनिशा, अवंतिका, पायल, रेखा सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए। अंत में आयोजकों ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य आज भी समाज को संवेदनशील और मानवीय बनने की प्रेरणा देता है।
