गोरखपुर
एमएमएमयूटी के विद्यार्थियों ने साइबर थाने में सीखी साइबर अपराध जांच की बारीकियां
छह सप्ताह की समर इंटर्नशिप के तहत मिला डिजिटल फोरेंसिक और साइबर सुरक्षा का व्यावहारिक प्रशिक्षण
गोरखपुर। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग स्थित साइबर फोरेंसिक रिसर्च सेंटर के 48 विद्यार्थियों ने सोमवार को गोरखपुर साइबर थाने का शैक्षणिक भ्रमण किया। छह सप्ताह के समर इंटर्नशिप कार्यक्रम के तहत आयोजित इस भ्रमण का उद्देश्य विद्यार्थियों को साइबर अपराध जांच, डिजिटल फोरेंसिक तकनीकों तथा कानून प्रवर्तन एजेंसियों की कार्यप्रणाली का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना था।
यह कार्यक्रम एमएमएमयूटी और गोरखपुर जोन पुलिस के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) के अंतर्गत कुलपति प्रो. अनुपमा कौशिक शर्मा तथा गोरखपुर जोन के पुलिस महानिदेशक मुथा अशोक जैन के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया।
भ्रमण के दौरान अपर पुलिस अधीक्षक सुधीर जायसवाल, साइबर थाना प्रभारी प्रहलाद सिंह, साइबर कमांडो उपेंद्र सिंह एवं उनकी टीम ने विद्यार्थियों को साइबर अपराधों की जांच प्रक्रिया और आधुनिक साइबर खतरों की विस्तृत जानकारी दी। अधिकारियों ने म्यूल बैंक अकाउंट, साइबर स्टॉकिंग, फिशिंग लिंक, दुर्भावनापूर्ण एपीके (APK) फाइलों के जरिए होने वाली ठगी, डिजिटल फुटप्रिंट तथा ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी साझा की।
विद्यार्थियों को महिलाओं के लिए उपलब्ध सुरक्षित साइबर शिकायत प्रणाली, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C), राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल, साइबर क्राइम वॉलंटियर्स कार्यक्रम तथा राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 के बारे में भी जानकारी दी गई। साथ ही उन्हें साइबर जागरूकता अभियान से जुड़कर समाज में डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए प्रेरित किया गया।
भ्रमण का मुख्य आकर्षण साइबर अपराध जांच में उपयोग किए जाने वाले सरकार द्वारा अनुमोदित डिजिटल फोरेंसिक उपकरणों का सजीव प्रदर्शन रहा। विद्यार्थियों ने डिजिटल साक्ष्यों के संग्रहण, संरक्षण, परीक्षण और विश्लेषण की प्रक्रिया को करीब से देखा तथा जांच के दौरान आने वाली तकनीकी और कानूनी चुनौतियों को भी समझा।
कार्यक्रम के अंत में समन्वयक डॉ. बी.के. शर्मा और डॉ. विमल कुमार ने साइबर थाना गोरखपुर के अधिकारियों एवं कर्मचारियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय और पुलिस के बीच इस प्रकार का सहयोग विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान, तकनीकी दक्षता तथा साइबर सुरक्षा और डिजिटल फोरेंसिक के क्षेत्र में सफल करियर के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
