जौनपुर
15 साल पुराने मारपीट मामले में तीन आरोपी साक्ष्य के अभाव में बरी
बक्शा थाना क्षेत्र के सवंसा गांव का मामला, अदालत ने गवाहों के पलटने पर दिया फैसला
जौनपुर। बक्शा थाना क्षेत्र के सवंसा गांव में वर्ष 2011 में हुए मारपीट और जानलेवा हमले के एक चर्चित मामले में अपर सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र प्रताप यादव की अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में तीन आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। इनमें दीवानी न्यायालय के अधिवक्ता आशुतोष उपाध्याय, लवकुश और अजय शामिल हैं।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 24 अक्टूबर 2011 की सुबह पुरानी जमीनी रंजिश को लेकर विवादित पेड़ काटने के दौरान दोनों पक्षों में झगड़ा हुआ था। शिकायतकर्ता चंद्रमणि उपाध्याय ने आरोप लगाया था कि आरोपियों ने घर में घुसकर कुल्हाड़ी व लाठी-डंडों से हमला किया, जिसमें कई लोग घायल हुए थे।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान मामला पूरी तरह पलट गया। पूर्व प्रधान रामजी उपाध्याय को छोड़कर अधिकांश गवाह अपने पहले दिए गए बयानों से मुकर गए। गवाहों ने अदालत में कहा कि पेड़ की डाल काटते समय लोग उसी से टकराकर घायल हुए थे, और आरोपियों द्वारा कोई मारपीट या धमकी नहीं दी गई थी।
इसके अलावा अभियोजन पक्ष चिकित्सा साक्ष्यों को भी प्रभावी रूप से प्रस्तुत नहीं कर सका। घायलों का परीक्षण करने वाले चिकित्सक की गवाही अदालत में दर्ज नहीं हो सकी, जिससे मामला और कमजोर हो गया।
सभी तथ्यों और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में असफल रहा। इसी आधार पर न्यायालय ने सभी आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।
मामले में एक आरोपी राकेश की मृत्यु हो चुकी थी, जिसके चलते उसके विरुद्ध कार्यवाही पहले ही समाप्त कर दी गई थी।
करीब 15 वर्ष पुराने इस मामले के फैसले के बाद यह प्रकरण एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
