बलिया
बलिया में आपातकाल की 51वीं वर्षगांठ पर गोष्ठी आयोजित
वक्ताओं ने कहा- आपातकाल लोकतंत्र का सबसे काला अध्याय, दोबारा न हो ऐसी व्यवस्था बने
लोकतंत्र सेनानियों ने प्रेस की आजादी और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा पर दिया जोर
बलिया। जेपी विचार मंच एवं लोकतंत्र सेनानी के संयुक्त तत्वावधान में सोबईबांध स्थित पं. वृंदावन मिश्र स्मृति परिसर में आपातकाल की 51वीं वर्षगांठ पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता लोकतंत्र सेनानी द्विजेन्द्र कुमार मिश्र ने की।
गोष्ठी को संबोधित करते हुए द्विजेन्द्र कुमार मिश्र ने कहा कि 25-26 जून 1975 की मध्यरात्रि को लगाया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय था। उन्होंने कहा कि उस दौरान प्रेस की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया गया तथा अनेक विपक्षी नेताओं को जेल भेज दिया गया। उन्होंने लोकनायक जयप्रकाश नारायण, अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, चंद्रशेखर और राजनारायण सहित कई नेताओं के संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 1977 में जनता ने लोकतांत्रिक तरीके से सत्ता परिवर्तन कर लोकतंत्र की ताकत का परिचय दिया।
उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए संवैधानिक स्तर पर प्रभावी प्रावधान किए जाने चाहिए, ताकि लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
गोष्ठी में अजय बहादुर सिंह, देवेन्द्र नाथ त्रिपाठी, संतोष कुमार शुक्ल, राजऋषि सिंह, शिवशरण तिवारी, रवि मिश्र, हनुमान यादव, प्रमोद यादव सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
