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वाराणसी

बायोमाइनिंग से होगा कई टन कचरे का निस्तारण, 25 एकड़ में बनेगा मियावाकी वन

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वाराणसी। करसड़ा स्थित कूड़े के विशाल ढेर से शहरवासियों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद है। नगर निगम ने वैज्ञानिक पद्धति से कचरे के निस्तारण की प्रक्रिया को तेज कर दिया है। कूड़ा हटने के बाद खाली होने वाली करीब 25 एकड़ भूमि पर मियावाकी तकनीक के माध्यम से सघन वन विकसित किया जाएगा, जो पर्यावरण संतुलन को मजबूती देगा।

नगर निगम ने करसड़ा में वर्षों से जमा लाखों मीट्रिक टन कचरे के निपटान के लिए बायोमाइनिंग तकनीक को अपनाया है। इस कार्य में जीआइजेड और आरपीयूईएस कंपनियों का सहयोग लिया जा रहा है। जापानी तकनीक के आधार पर इन एजेंसियों ने डंपिंग साइट की मैपिंग करते हुए कचरे की मात्रा का आकलन कर लिया है। निगम की ओर से बायोमाइनिंग के लिए टेंडर प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है, जिससे जल्द ही जमीनी स्तर पर कार्य शुरू होने की संभावना है।

करसड़ा में पिछले लगभग एक दशक से जमा करीब 1264 लाख मीट्रिक टन कचरे के कारण आसपास के क्षेत्रों में लंबे समय से दुर्गंध और प्रदूषण की गंभीर समस्या बनी हुई है। कचरे की भारी मात्रा को देखते हुए विशेषज्ञों का अनुमान है कि इसके वैज्ञानिक निस्तारण में लगभग एक से डेढ़ वर्ष का समय लग सकता है। शासन से अनुमति मिलने के बाद अब इस दिशा में कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है।

शहर में प्रतिदिन औसतन 1000 से 1200 मीट्रिक टन ठोस कचरा उत्पन्न होता है। इसके निस्तारण के लिए करसड़ा में 600 मीट्रिक टन क्षमता का ‘वेस्ट टू कंपोस्ट’ प्लांट तथा रमना में 600 मीट्रिक टन क्षमता का ‘वेस्ट टू चारकोल’ प्लांट संचालित है। इसके अतिरिक्त रमना में ही मलबे से ईंट और टाइल्स बनाने हेतु सीएंडडी प्लांट भी कार्यरत है।

नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने बताया कि करसड़ा का कूड़ा पहाड़ समाप्त होने के बाद वहां विकसित किया जाने वाला 25 एकड़ का मियावाकी वन शहर के ‘ग्रीन लंग्स’ के रूप में कार्य करेगा। वहीं महापौर अशोक कुमार तिवारी ने कहा कि करसड़ा के कचरे का निस्तारण नगर निगम की प्राथमिकताओं में शामिल है। बायोमाइनिंग प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है और कचरा हटने के बाद वहां विकसित होने वाला मियावाकी वन वाराणसी को स्वच्छ और हरित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

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