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पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का निधन, बेटे को प्रधानमंत्री ने बंधाया ढांढस

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राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृह मंत्री समेत कई राष्ट्रीय नेताओं ने व्यक्त की शोक संवेदना

झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक और तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री रहे शिबू सोरेन का सोमवार सुबह निधन हो गया। वे 81 वर्ष के थे और दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में वेंटिलेटर पर थे। लंबे समय से किडनी की बीमारी से जूझ रहे दिशोम गुरु (शिबू सोरेन) को सोमवार सुबह 8:56 बजे मृत घोषित किया गया।

शिबू सोरेन के निधन की पुष्टि उनके बेटे और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने की। सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट में उन्होंने लिखा, “आदरणीय दिशोम गुरुजी हम सभी को छोड़कर चले गए। आज मैं शून्य हो गया हूं।”

पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का पार्थिव शरीर आज शाम रांची लाया जाएगा। उनका अंतिम संस्कार कल दोपहर तीन बजे रामगढ़ जिले के उनके पैतृक गांव नेमरा में किया जाएगा। इससे पहले पार्थिव शरीर को मोरहाबादी स्थित आवास, पार्टी कार्यालय और झारखंड विधानसभा में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा।

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह समेत कई राष्ट्रीय नेताओं ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। झारखंड सरकार ने तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया है। पूर्व मुख्यमंत्री के निधन की खबर मिलते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सीधे दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल पहुंचे और उनके बेटे हेमंत सोरेन को ढांढस बंधाया।

पीएम मोदी ने शिबू सोरेन को याद करते हुए लिखा कि शिबू सोरेन एक जमीनी स्तर के नेता थे,जो लोगों के प्रति अटूट समर्पण के साथ सार्वजनिक जीवन में आगे बढ़े। उन्हें विशेष रूप से आदिवासी समुदायों,गरीबों और वंचितों को सशक्त बनाने का बहुत शौक था। उनके निधन से बहुत दुख हुआ है। मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और चाहने वालों के साथ हैं। मैंने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बात की और उन्हें शोक संवेदनाएं व्यक्त कीं। ओम शांति।

शिबू सोरेन का जन्म 11 जनवरी 1944 को रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में हुआ था। उन्होंने 1970 के दशक में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की स्थापना की और आदिवासियों के जल-जंगल-जमीन के अधिकारों के लिए लंबे संघर्ष का नेतृत्व किया। 15 नवंबर 2000 को झारखंड राज्य के गठन में उनका योगदान ऐतिहासिक रहा। वे 1980 में पहली बार लोकसभा पहुंचे और कई बार सांसद बने।

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राजनीतिक जीवन में कई उतार-चढ़ाव के बावजूद उन्होंने आदिवासी समुदाय की आवाज को संसद से लेकर सड़क तक बुलंद किया। हालांकि, कुछ कानूनी विवादों में भी उनका नाम सामने आया, जिनमें वे बाद में बरी हो गए।

झारखंड के राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य में शिबू सोरेन का योगदान अमिट रहेगा। उन्हें ‘दिशोम गुरु’ के रूप में आदिवासी समाज में विशेष सम्मान प्राप्त था। उनके निधन से झारखंड और देश की राजनीति में एक युग का अंत हो गया है।

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