आजमगढ़
18 लाख के पंचायत भवन पर सवाल, पांच साल बाद भी शौचालय अधूरा होने का आरोप
तरवां के सराय बिंद्रावन में ग्रामीणों ने प्रधान और सचिव पर विकास कार्यों में अनियमितता का लगाया आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग
आजमगढ़। जिले के तरवां ब्लॉक की ग्रामसभा सराय बिंद्रावन में करीब 18 लाख रुपये की लागत से बने पंचायत भवन को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के करीब पांच वर्ष बीत जाने के बाद भी पंचायत भवन के शौचालय में सीट और दरवाजा तक नहीं लगाया गया है। साथ ही पंचायत भवन में पेयजल, नियमित साफ-सफाई और अन्य मूलभूत सुविधाओं की कमी का भी आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर कार्रवाई की मांग की है।
शौचालय में सीट और दरवाजा न होने का आरोप
ग्रामीणों के अनुसार पंचायत भवन का निर्माण करीब 18 लाख रुपये की लागत से कराया गया था, लेकिन पांच वर्ष बीतने के बाद भी शौचालय की व्यवस्था पूरी नहीं हो सकी। उनका कहना है कि शौचालय में सीट और दरवाजे नहीं लगाए गए हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सरकारी धन खर्च होने के बावजूद भवन की सुविधाएं अधूरी हैं। पंचायत भवन की वर्तमान स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों ने नाराजगी जताई है।
पंचायत भवन में ताला और साफ-सफाई न होने की शिकायत
स्थानीय लोगों का कहना है कि पंचायत भवन अक्सर बंद रहता है और ग्रामीणों को इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक भवन में पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं है और साफ-सफाई भी नियमित रूप से नहीं कराई जाती। उनका आरोप है कि पंचायत भवन लंबे समय तक बंद रहने से सरकारी भवन का उपयोग ग्रामीणों के लिए नहीं हो पा रहा है।
प्रधान और सचिव पर अनियमितता के आरोप
ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान महेंद्र पासवान और सचिव उमाशंकर पर सरकारी योजनाओं में अनियमितता के आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि विकास कार्यों को कागजों में पूरा दिखाकर सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि नाली-नाला सफाई, खड़ंजा, डस्टबिन और सोलर लाइट सहित विभिन्न विकास कार्यों का लाभ धरातल पर अपेक्षानुसार दिखाई नहीं दे रहा है।
सफाई कर्मी की कार्यप्रणाली पर भी उठाए सवाल
ग्रामीणों ने गांव में तैनात सफाई कर्मी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि सफाई कर्मी नियमित रूप से गांव में सफाई कार्य नहीं करता और केवल उपस्थिति दर्ज कराकर चला जाता है। ग्रामीणों ने इस मामले की भी जांच कराने की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
जिलाधिकारी से उच्चस्तरीय जांच की मांग
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से पंचायत भवन के निर्माण और ग्रामसभा में कराए गए अन्य विकास कार्यों की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सभी विकास कार्यों की जांच कराई जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
