Connect with us

गाजीपुर

13 बार टीईटी/सीटेट और नेट पास, फिर भी नौकरी नहीं; ई-रिक्शा चलाने को मजबूर अमित

Published

on

Loading...
Loading...

उच्च शिक्षा और योग्यता के बावजूद नहीं मिला सरकारी रोजगार

दिन में शिक्षक, शाम को ई-रिक्शा चालक बनकर चला रहे परिवार का खर्च

बहरियाबाद (गाजीपुर)। क्षेत्र के खाजेपुर गांव निवासी अमित कुमार की कहानी बेरोजगारी और लंबित भर्ती प्रक्रियाओं की एक ऐसी तस्वीर पेश करती है, जो हजारों शिक्षित युवाओं की पीड़ा को बयां करती है। अंग्रेजी विषय में एमए, बीएड, एमएड और नेट जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाएं उत्तीर्ण करने के साथ-साथ 13 बार टीईटी/सीटेट पास करने के बावजूद अमित को अब तक सरकारी नौकरी नहीं मिल सकी है। मजबूरी में वह अपने ई-रिक्शा पर अपनी शैक्षणिक योग्यताएं लिखवाकर सड़कों पर सवारी ढो रहे हैं।

अमित कुमार दिन में एक निजी विद्यालय में अध्यापन कार्य करते हैं, जबकि शाम को ई-रिक्शा चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। उनका कहना है कि निजी विद्यालय से मिलने वाला वेतन परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है, इसलिए अतिरिक्त आय के लिए उन्हें यह कार्य करना पड़ रहा है।

शिक्षक बनने का सपना अधूरा

Advertisement

अमित ने बताया कि उन्होंने Banaras Hindu University से बीए ऑनर्स की पढ़ाई की। इसके बाद टीडी पीजी कॉलेज, जौनपुर से अंग्रेजी विषय में परास्नातक किया। उन्होंने बीएड, एमएड और नेट जैसी परीक्षाएं भी सफलता पूर्वक उत्तीर्ण कीं। उनका सपना टीजीटी या प्रवक्ता बनकर शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देने का था, लेकिन भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और अनियमितताओं ने उनके सपनों को अधूरा छोड़ दिया।

एक अंक से छूटा मौका

अमित बताते हैं कि वर्ष 2011 की 72,825 शिक्षक भर्ती में लगभग 7,500 पद रिक्त रह गए थे। उस भर्ती में 102 अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को नियुक्ति मिली, जबकि 101 अंक होने के कारण वह चयन से वंचित रह गए। यह पीड़ा आज भी उन्हें सालती है।

2022 की टीजीटी भर्ती अब तक अधर में

उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में टीजीटी भर्ती का विज्ञापन जारी हुआ था, लेकिन अब तक परीक्षा आयोजित नहीं हो सकी है। इससे हजारों अभ्यर्थियों की तरह वह भी निराशा और अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं।

Advertisement

पत्नी भी उच्च शिक्षित, फिर भी निजी विद्यालय में नौकरी

अमित की पत्नी रजनी बाला भी एमएससी और बीएड उत्तीर्ण हैं। इसके बावजूद उन्हें सरकारी नौकरी नहीं मिल सकी और वह भी एक निजी विद्यालय में अध्यापन कार्य कर रही हैं। दोनों पति-पत्नी उच्च शिक्षित होने के बावजूद सरकारी सेवा से वंचित हैं।

बेरोजगारी की कड़वी सच्चाई

खाजेपुर निवासी अमित कुमार की कहानी केवल एक व्यक्ति की संघर्ष गाथा नहीं, बल्कि प्रदेश के उन हजारों युवाओं की व्यथा है, जिन्होंने वर्षों तक कठिन परिश्रम कर उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त की, लेकिन समय पर भर्तियां न होने के कारण आज भी रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

Advertisement

Continue Reading
Advertisement
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Copyright © 2024 Jaidesh News. Created By Hoodaa

You cannot copy content of this page