गाजीपुर
धड़ल्ले से बिक रही मिलावटी ताड़ी, युवाओं में बढ़ रही नशे की लत
बहरियाबाद क्षेत्र में सुबह-शाम ताड़ी की दुकानों पर जुट रही भीड़
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने मिलावटी ताड़ी के सेवन को बताया बेहद खतरनाक
बहरियाबाद (गाजीपुर)। बहरियाबाद एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों ताड़ी की बिक्री धड़ल्ले से हो रही है। सुबह और शाम ताड़ी की दुकानों पर लोगों का जमावड़ा देखा जा रहा है। खासकर युवाओं में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति चिंता का विषय बनती जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ताड़ी के सेवन के बाद कई युवक गाली-गलौज, विवाद और मारपीट जैसी घटनाओं में भी शामिल हो रहे हैं।
क्षेत्र में असली ताड़ी के नाम पर मिलावटी ताड़ी बेचे जाने की भी चर्चा है। जानकारों के अनुसार प्राकृतिक ताड़ी जल्दी खराब हो जाती है, इसलिए उसे लंबे समय तक नशीला बनाए रखने के लिए उसमें विभिन्न प्रकार के रसायनों की मिलावट की जाती है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक साबित हो सकते हैं।
लीवर, किडनी और मस्तिष्क पर पड़ता है दुष्प्रभाव
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार मिलावटी ताड़ी में कई प्रकार के हानिकारक पदार्थ मिलाए जाने की आशंका रहती है। ऐसे रसायनों के सेवन से लीवर संबंधी गंभीर बीमारियां, पेट की समस्याएं और पाचन तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। लगातार सेवन से लीवर सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारी का खतरा भी बढ़ जाता है।
मिलावटी नशीले पदार्थों का असर मस्तिष्क पर भी पड़ता है, जिससे याददाश्त कमजोर होना, मानसिक असंतुलन, धुंधला दिखाई देना तथा हाथ-पैरों में कंपन जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
गर्मी में बढ़ सकता है डिहाइड्रेशन का खतरा
गर्मी के मौसम में शरीर को अधिक पानी की आवश्यकता होती है। नशीले पेय पदार्थों के अत्यधिक सेवन से शरीर में पानी और आवश्यक खनिज तत्वों की कमी हो सकती है। इससे कमजोरी, चक्कर आना तथा हीट स्ट्रोक जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है।
प्राकृतिक पेय पदार्थों को दें प्राथमिकता
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का सुझाव है कि गर्मियों में ताड़ी या अन्य नशीले पेय पदार्थों के बजाय नारियल पानी, नींबू पानी, बेल का शरबत और अन्य प्राकृतिक पेय पदार्थों का सेवन करना अधिक सुरक्षित और लाभदायक है। इससे शरीर को पर्याप्त ऊर्जा और पोषण मिलता है तथा स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी कम रहते हैं।
