गोरखपुर
वैभव हत्याकांड: एआई और वर्चुअल नंबर के सहारे रची गई साजिश, पुलिस जांच में बड़े खुलासे
199 रुपये में खरीदा कंबोडिया का वर्चुअल नंबर, लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम पर मांगी फिरौती; डिजिटल साक्ष्यों की जांच तेज
गोरखपुर। खजनी क्षेत्र के चर्चित वैभव अपहरण एवं हत्या कांड की जांच में पुलिस को कई अहम सुराग मिले हैं। पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी ने अपराध को अंजाम देने से पहले आधुनिक तकनीक और डिजिटल माध्यमों का सुनियोजित तरीके से इस्तेमाल किया। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने कथित तौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से फिरौती मांगने के तरीके, पहचान छिपाने के उपाय तथा जहरीले पदार्थों से संबंधित जानकारी जुटाई थी।
कंबोडिया का वर्चुअल नंबर खरीदकर मांगी फिरौती
पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने करीब 199 रुपये खर्च कर कंबोडिया का एक वर्चुअल मोबाइल नंबर खरीदा। इसी नंबर के माध्यम से कारोबारी परिवार को लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम पर व्हाट्सएप संदेश भेजकर फिरौती मांगी गई, ताकि पुलिस और परिजन किसी संगठित गैंग की संलिप्तता मानकर भ्रमित हो जाएं।
डिजिटल माध्यमों से छिपाई पहचान
जांच एजेंसियों का कहना है कि आरोपी ने अपनी पहचान छिपाने और जांच को भटकाने के लिए विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया। आरोपी के मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच में कई महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। पुलिस के अनुसार, इंटरनेट सर्च हिस्ट्री और चैट रिकॉर्ड से संकेत मिले हैं कि अपराध की योजना पहले से बनाई गई थी और इसके लिए ऑनलाइन माध्यमों से जानकारी जुटाई गई थी।
फोरेंसिक जांच में जुटी पुलिस
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले की प्रत्येक कड़ी को वैज्ञानिक और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जोड़ा जा रहा है। आरोपी के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है, जिससे यह स्पष्ट किया जा सके कि अपराध की योजना कब और किस प्रकार तैयार की गई।
डिजिटल नेटवर्क की गहन पड़ताल जारी
पुलिस के अनुसार, मामले में इस्तेमाल किए गए वर्चुअल नंबर, ऑनलाइन गतिविधियों और आरोपी के संपर्कों की गहन जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
