गोरखपुर
लखनऊ–कानपुर एक्सप्रेसवे की उच्चस्तरीय जांच की मांग
ऑल इंडिया ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन ने NHAI से RTI के तहत 25 बिंदुओं पर मांगी जानकारी, गुणवत्ता और पारदर्शिता पर उठाए सवालa
गोरखपुर। ऑल इंडिया ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष पन्नेलाल यादव ने लगभग ₹4,700 करोड़ की लागत से निर्मित लखनऊ–कानपुर एक्सप्रेसवे में कथित तकनीकी खामियों और सड़क धंसने की खबरों को गंभीर बताते हुए पूरे प्रकरण की स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। संगठन ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) से सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत 25 बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी भी मांगी है।
राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्री को भेजा शिकायत पत्र
पन्नेलाल यादव ने बताया कि एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई 2026 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने किया था। उद्घाटन के बाद सड़क के कुछ हिस्सों में तकनीकी समस्याओं और टोल वसूली स्थगित होने की खबरें सामने आईं। इसे जनहित और सार्वजनिक धन से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए संगठन ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री, NHAI अध्यक्ष तथा CBI को शिकायत पत्र भेजकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।
गुणवत्ता परीक्षण, ऑडिट और जवाबदेही की मांग
संगठन ने RTI के माध्यम से परियोजना की डीपीआर, निर्माण एजेंसी के चयन, गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट, थर्ड पार्टी निरीक्षण, भुगतान, तकनीकी स्वीकृतियों, दोष दायित्व (Defect Liability), मरम्मत कार्य और टोल संचालन सहित 25 महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जानकारी मांगी है। साथ ही IIT, CRRI या अन्य विशेषज्ञ संस्थान से फोरेंसिक गुणवत्ता परीक्षण, परियोजना का वित्तीय एवं तकनीकी ऑडिट तथा दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों, एजेंसियों और निर्माण कंपनियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है।
पन्नेलाल यादव ने कहा कि संगठन का उद्देश्य किसी को बिना जांच दोषी ठहराना नहीं, बल्कि जनहित, सार्वजनिक धन की सुरक्षा और राष्ट्रीय अवसंरचना परियोजनाओं में गुणवत्ता, पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित कराना है।
