गाजीपुर
मोहर्रम की चौथी तारीख पर निकला दुलदुल का जुलूस
हजारों अकीदतमंदों ने हजरत इमाम हुसैन को पेश की खिराज-ए-अकीदत
मातम और मजलिस के बीच गूंजती रहीं ‘या हुसैन’ की सदाएं, देर रात तक चला कार्यक्रम
गाजीपुर। मोहर्रम की चौथी तारीख पर नगर के जफरपुरा स्थित दुलदुल मोहल्ले से हजरत इमाम हुसैन की याद में दुलदुल का जुलूस अकीदत और एहतराम के साथ निकाला गया। बाद नमाज-ए-ईशा रात्रि लगभग नौ बजे दुलदुल की सवारी उठाई गई, जिसमें हजारों की संख्या में अकीदतमंदों ने शामिल होकर कर्बला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश की।
जुलूस के दौरान अंजुमन आजाद, अंजुमन हुसैनिया, अंजुमन अंसारियां एवं अंजुमन गुलजार हैदरी सहित विभिन्न अंजुमनों के सदस्यों ने सीना-जनी और मातम किया। ‘या हुसैन’ की सदाओं से पूरा क्षेत्र गूंज उठा और लोगों ने गम-ए-हुसैन में अपने जज्बात का इजहार किया।
मोहर्रम में दुलदुल का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। मान्यता के अनुसार दुलदुल हजरत इमाम हुसैन के वफादार घोड़े का प्रतीक है, जो कर्बला की जंग में उनके साथ रहा था। दुलदुल की सवारी निकालकर अकीदतमंद कर्बला के शहीदों की कुर्बानी को याद करते हैं तथा इंसानियत, सत्य और न्याय के लिए दी गई उनकी शहादत को सलाम करते हैं।
रात्रि लगभग 11 बजे तक दुलदुल मोहल्ले में मजलिस और मातम का सिलसिला जारी रहा। इसके बाद दुलदुल की सवारी जुलूस की शक्ल में दुलदुल मोहल्ले से निकलकर जामा मस्जिद मार्ग, सदर रोड, अग्रवाल टोली और पोखरा मोहल्ला होते हुए पुनः अपने निर्धारित स्थान दुलदुल मोहल्ले के चौक पर पहुंची, जहां धार्मिक परंपराओं के अनुसार दुलदुल को विधिवत बिठाया गया।
पूरे कार्यक्रम के दौरान श्रद्धा, अनुशासन और गम का माहौल बना रहा। अकीदतमंदों ने हजरत इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए उनकी शिक्षाओं एवं आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।
