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गाजीपुर

मिलावटी मिठाइयों का बढ़ता कारोबार: शादी की मिठास में न घुल जाए बीमारी

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शादी-विवाह के सीजन में बढ़ी मिलावट, विशेषज्ञों ने बरतने की दी सलाह

सिंथेटिक मावा, नकली घी और कृत्रिम रंग बन सकते हैं गंभीर बीमारियों का कारण

बहरियाबाद (गाजीपुर)। शादी-विवाह के सीजन में मिठाइयों की मांग बढ़ने के साथ ही बाजार में मिलावटी मिठाइयों का कारोबार भी तेजी पकड़ लेता है। अधिक मुनाफा कमाने की होड़ में कुछ कारोबारी नकली मावा, मिलावटी घी और हानिकारक रसायनों का उपयोग कर मिठाइयां तैयार कर रहे हैं, जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं।

जानकारों के अनुसार, नकली मावा तैयार करने के लिए कई बार दूध के स्थान पर यूरिया, डिटर्जेंट, घटिया तेल और अन्य रासायनिक पदार्थों का प्रयोग किया जाता है। वहीं शुद्ध चांदी के वर्क की जगह एल्युमिनियम का वर्क तथा मिठाइयों को आकर्षक बनाने के लिए गैर-खाद्य कृत्रिम रंगों का इस्तेमाल भी किया जाता है। रबड़ी और पनीर को गाढ़ा दिखाने के लिए निम्न गुणवत्ता वाले स्टार्च जैसे पदार्थ मिलाए जाने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।

स्वास्थ्य पर पड़ सकता है गंभीर असर

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विशेषज्ञों के अनुसार मिलावटी मिठाइयों के सेवन से फूड पॉइजनिंग, उल्टी, दस्त, पेट दर्द और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लंबे समय तक ऐसे रसायनों के सेवन से लिवर और किडनी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। कृत्रिम रंगों और अन्य हानिकारक रसायनों के अधिक उपयोग को लेकर विभिन्न स्वास्थ्य संस्थाओं ने भी समय-समय पर सावधानी बरतने की सलाह दी है।

बच्चों और बुजुर्गों पर इसका असर अधिक गंभीर हो सकता है। मिलावटी खाद्य पदार्थ उनके स्वास्थ्य, पाचन तंत्र और रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं।

सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव

विशेषज्ञों का सुझाव है कि शादी-विवाह या अन्य आयोजनों के लिए मिठाइयां केवल विश्वसनीय और लाइसेंसधारी दुकानों से ही खरीदें। मिठाइयों की गुणवत्ता, रंग, गंध और ताजगी पर विशेष ध्यान दें। यदि संभव हो तो घर में बने पकवानों या ताजे फलों को प्राथमिकता दें। थोड़ी-सी सावधानी न केवल आपके परिवार बल्कि मेहमानों को भी संभावित स्वास्थ्य जोखिम से बचा सकती है।

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