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मिर्ज़ापुर

मिर्जापुर में ‘टीबी मुक्त पंचायत’ अभियान पर उठे सवाल

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शासन के निर्देशों के बावजूद ग्राम पंचायतों तक नहीं पहुंच रही टीबी उन्मूलन सामग्री, ग्रामीण क्षेत्रों में अभियान की रफ्तार पर सवाल

मिर्जापुर। केंद्र और राज्य सरकार की ओर से चलाए जा रहे ‘टीबी मुक्त भारत अभियान’ के तहत ग्रामीण क्षेत्रों को टीबी मुक्त बनाने के लिए ‘टीबी मुक्त पंचायत’ पहल शुरू की गई है। हालांकि मिर्जापुर जिले में स्वास्थ्य विभाग और टीबी विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि शासन स्तर से निर्देश मिलने के बावजूद टीबी उन्मूलन से जुड़ी जरूरी सामग्री ग्राम पंचायतों तक नहीं पहुंच पा रही है।

कागजों तक सीमित होने का आरोप

सरकार की मंशा है कि ग्राम पंचायतों के माध्यम से टीबी मरीजों की पहचान कर उन्हें समय पर जांच, दवा और पोषण सहायता उपलब्ध कराई जाए। इसके लिए प्रचार-प्रसार सामग्री, जांच किट और अन्य संसाधन ग्राम पंचायत स्तर तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के कई ग्राम प्रधानों और लोगों का कहना है कि उन्हें अभियान से संबंधित आवश्यक सामग्री और दिशा-निर्देश अब तक प्राप्त नहीं हुए हैं।

जागरूकता और संसाधनों की कमी

स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य कर्मियों और पंचायत प्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय नहीं होने से भी अभियान प्रभावित होने की बात सामने आ रही है। ग्रामीणों में टीबी के लक्षणों और सरकारी स्तर पर मिलने वाले निःशुल्क इलाज की जानकारी पहुंचाने में भी कमी बताई जा रही है।

टीबी मरीजों के लिए निःक्षय मित्र और पोषण सहायता योजना को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि विभागीय प्रक्रिया धीमी होने के कारण जरूरतमंद मरीजों तक पोषण सहायता और आर्थिक मदद प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच पा रही है।

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दूरदराज के क्षेत्रों में चिंता

मड़िहान, हलिया और लालगंज जैसे ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में टीबी को लेकर विशेष सतर्कता की जरूरत बताई जा रही है। स्थानीय ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों का आरोप है कि आवश्यक किट और जागरूकता सामग्री उपलब्ध नहीं होने से मरीजों की समय पर पहचान और जांच प्रभावित हो रही है।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उच्च अधिकारियों से मामले की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि ग्राम पंचायतों तक टीबी उन्मूलन से जुड़ी सामग्री और संसाधन जल्द पहुंचाए जाएं तथा यदि कहीं लापरवाही हुई है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि शासन की मंशा के अनुरूप जमीनी स्तर पर काम हुए बिना ‘टीबी मुक्त पंचायत’ का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल होगा।

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