मिर्ज़ापुर
आमघाट रेलवे ओवरब्रिज धंसने के मामले में जांच और कार्रवाई की धीमी रफ्तार पर सवाल
करीब 64 करोड़ की लागत से बने आरओबी के एप्रोच मार्ग के धंसने से उठे सवाल, दोषियों पर कार्रवाई की मांग
मिर्जापुर। करीब 64 करोड़ रुपये की लागत से बने बहुचर्चित आमघाट रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) के एप्रोच मार्ग के धंसने के मामले में जांच समिति के आदेश और दंडात्मक कार्रवाई में देरी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। पुल के चालू होने के महज कुछ महीनों बाद एप्रोच मार्ग धंसने की घटना ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और निर्माण एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना के बाद निर्माण गुणवत्ता को लेकर घटिया सामग्री, तकनीकी लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए। एप्रोच मार्ग धंसने से यातायात प्रभावित होने के साथ यात्रियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता पैदा हुई।
मामले की जानकारी मिलने के बाद केंद्रीय मंत्री और स्थानीय सांसद अनुप्रिया पटेल ने सख्त रुख अपनाते हुए निर्माण कार्य की तकनीकी गुणवत्ता की जांच के लिए उच्चस्तरीय जांच समिति गठित करने और जिम्मेदार निर्माण एजेंसी, ठेकेदार तथा विभागीय इंजीनियरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
हालांकि, स्थानीय स्तर पर आरोप है कि निर्देशों के बावजूद कार्रवाई की प्रक्रिया धीमी गति से आगे बढ़ रही है। अब तक दोषी ठेकेदारों या संबंधित इंजीनियरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने अथवा निलंबन जैसी कार्रवाई सामने नहीं आने से लोगों में नाराजगी है। जांच समिति की अंतिम रिपोर्ट की स्थिति और उसमें सामने आई कमियों के अनुपालन को लेकर भी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक नहीं होने से सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद इतनी जल्दी एप्रोच मार्ग का धंसना निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था की गंभीरता पर सवाल खड़ा करता है। लोगों ने मांग की है कि मामले की जांच जल्द पूरी कर जिम्मेदार अधिकारियों और कार्यदायी संस्था के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
इसके साथ ही एप्रोच रोड का उच्चस्तरीय तकनीकी पुनर्मूल्यांकन कर स्थायी मरम्मत कराने की मांग की गई है, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे की आशंका को टाला जा सके। स्थानीय लोगों का कहना है कि जांच और कार्रवाई में किसी भी तरह की देरी जनता की सुरक्षा के साथ समझौता साबित हो सकती है।
