गोरखपुर
भाजपा नेता की हत्या के पांच महीने बाद पत्नी ने थामा सपा का दामन
इंसाफ न मिलने का आरोप लगाते हुए सुशीला चौहान ने अखिलेश यादव की मौजूदगी में ली पार्टी की सदस्यता
गोरखपुर। करीब पांच महीने पहले हुई भाजपा नेता राजकुमार चौहान की हत्या का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। न्याय न मिलने का आरोप लगाते हुए उनकी पत्नी सुशीला चौहान ने भाजपा छोड़कर समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। लखनऊ स्थित सपा के प्रदेश मुख्यालय में राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में उन्होंने पार्टी की सदस्यता ली। इस दौरान गोरखपुर के सपा जिलाध्यक्ष बृजेश कुमार गौतम समेत अन्य नेता मौजूद रहे।
पति की हत्या के बाद न्याय के लिए संघर्ष का दावा
सुशीला चौहान ने आरोप लगाया कि उनके पति की हत्या को करीब पांच महीने बीत चुके हैं, लेकिन परिवार को अब तक अपेक्षित न्याय नहीं मिला है। उन्होंने मामले की जांच की दिशा और पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए हैं।
राजकुमार चौहान को गोरखपुर के चिलुआताल थाना क्षेत्र में सक्रिय भाजपा नेता बताया जाता था। वह पनियरा विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय थे और राज्यसभा सांसद डॉ. राधामोहन दास अग्रवाल तथा मंत्री दारा सिंह चौहान के करीबी माने जाते थे।
17 मार्च को मॉर्निंग वॉक के दौरान हुई थी हत्या
बताया गया कि 17 मार्च की सुबह राजकुमार चौहान मॉर्निंग वॉक के लिए निकले थे। इसी दौरान अज्ञात हमलावरों ने उन पर धारदार हथियार से हमला कर दिया, जिससे उनकी मौत हो गई थी।
हत्या के बाद उनकी पत्नी ने स्थानीय पार्षद धर्मदेव चौहान और उनके करीबियों पर भी गंभीर आरोप लगाए थे। हालांकि, पुलिस की जांच में पार्षद को क्लीन चिट दिए जाने की बात सामने आई। पुलिस ने मामले की जांच पारिवारिक विवाद और रंजिश के एंगल से किए जाने की बात कही थी।
सपा में शामिल होने से मामला फिर सियासी चर्चा में
सुशीला चौहान के सपा में शामिल होने के बाद राजकुमार चौहान हत्याकांड ने एक बार फिर राजनीतिक चर्चा तेज कर दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद गोरखपुर में भाजपा से जुड़े नेता की पत्नी का न्याय न मिलने का आरोप लगाते हुए विपक्षी दल में शामिल होना भाजपा के लिए असहज स्थिति मानी जा रही है।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सुशीला चौहान का पार्टी में स्वागत किया और पीड़ित परिवार के साथ खड़े रहने की बात कही। इसके बाद राजकुमार चौहान हत्याकांड अब कानून-व्यवस्था के साथ-साथ गोरखपुर की सियासत में भी चर्चा का विषय बन गया है।
