बलिया
पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्यता हटाने की मांग, शिक्षकों का कलेक्ट्रेट मार्च
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के बैनर तले प्रदर्शन, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन
बलिया। 27 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग को लेकर गुरुवार को राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के बैनर तले शिक्षकों ने धरना-प्रदर्शन किया। इसके बाद शिक्षकों ने कलेक्ट्रेट तक मार्च निकालकर जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा।
पूर्व प्रभाव से नियम लागू करना न्यायसंगत नहीं : राजेश कुमार सिंह
धरना सभा को संबोधित करते हुए जिला संयोजक राजेश कुमार सिंह ने कहा कि 27 जुलाई 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों की नियुक्ति उस समय की प्रचलित नियमावली के तहत हुई थी। ऐसे में बाद में लागू किए गए टीईटी नियम को पूर्व प्रभाव से लागू करना प्राकृतिक न्याय और संवैधानिक सिद्धांतों के विपरीत है।
उन्होंने कहा कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों की सेवा सुरक्षा और सम्मान की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है तथा उनके अधिकारों का संरक्षण किया जाना चाहिए।
सेवा सुरक्षा और वैधानिक अधिकारों की रक्षा की मांग
प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने मांग की कि पूर्व नियुक्त शिक्षकों के संवैधानिक एवं वैधानिक अधिकारों को सुरक्षित रखते हुए टीईटी की अनिवार्यता समाप्त की जाए। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लिया जाना आवश्यक है, ताकि शिक्षकों में व्याप्त असमंजस और चिंता समाप्त हो सके।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
शिक्षकों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
बड़ी संख्या में शिक्षक रहे मौजूद
प्रदर्शन में राजेश सिंह, ज्ञान प्रकाश उपाध्याय, अकिलुर्रहमान खान, संजीव कुमार सिंह, ओंकार सिंह, कर्ण प्रताप सिंह, अमित यादव, मुकेश सिंह, समीर कुमार पाण्डेय, संजय पाण्डेय, विनय राय, गणेश सिंह, राघवेन्द्र सिंह, सतेन्द्र चौबे, अशोक तिवारी सहित बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल रहे।
