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जौनपुर

करबला के 72 शहीदों की याद में बरामद हुए 72 शबीहे ताबूत

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अकीदतमंदों ने अर्पित की श्रद्धांजलि

इमामबाड़ा हुसैनिया मीरघर में आयोजित मजलिस में करबला की कुर्बानियों का हुआ जिक्र, बड़ी संख्या में पहुंचे जायरीन

जौनपुर। शहर के पानदरीबा स्थित इमामबाड़ा हुसैनिया मीरघर में 17 सफ़र के अवसर पर हर वर्ष की परंपरा के अनुसार इस वर्ष भी करबला के 72 शहीदों की याद में 72 शबीहे ताबूत बरामद किए गए। इस अवसर पर बड़ी संख्या में अकीदतमंदों और जायरीन ने पहुंचकर शहीदाने करबला को ख़िराज-ए-अकीदत पेश की तथा ताबूतों की ज़ियारत की।

कार्यक्रम का शुभारंभ पेशख्वानी से हुआ। इस दौरान जाफर अली रवीश, सज्जाद नकी, शब्बीर जौनपुरी, याज्दान मेहदी, मेहदी जैदी, वहदत जैदी, अली रज़ा, अरबाज़ रिजवी, एहतेशाम रिजवी, आलियान जैदी और गुलाम असकरी जैदी ने अपने कलाम पेश किए। इसके बाद सैय्यद समर रज़ा एवं उनके हमनवाओं ने सोज़ख्वानी की, जिससे पूरा माहौल गमगीन हो गया।

मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना सैय्यद सफदर हुसैन जैदी ने हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके 72 वफ़ादार साथियों की शहादत का उल्लेख करते हुए कहा कि करबला इंसानियत, सब्र, त्याग और सत्य के मार्ग पर अडिग रहने का संदेश देती है। उन्होंने शहीदाने करबला की कुर्बानियों को मानवता के लिए प्रेरणास्रोत बताया।

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72 शबीहे ताबूत की नक़ाबत सैय्यद गुलाम अब्बास ने की। पूरी रात दूर-दराज़ से आए जायरीन इमामबाड़ा पहुंचकर ताबूतों की ज़ियारत करते रहे और शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

अगले दिन 18 सफ़र को दोपहर तीन बजे 72 ताबूतों की अलविदाई मजलिस आयोजित की गई, जिसे सैय्यद अली नकी ने संबोधित किया। इस अवसर पर अबुज़र जैदी एवं अंजुमन ज़ुल्फ़ेकारिया ने दर्दभरी नौहाख्वानी प्रस्तुत की, जिससे माहौल भावुक हो उठा।

कार्यक्रम के अंत में 72 ताबूत कमेटी की ओर से सभी जायरीन, अंजुमनों और आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले लोगों का आभार व्यक्त किया गया। पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धा, अनुशासन और सौहार्द का वातावरण बना रहा।

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