गोरखपुर
पंक्चर दुकानदार के नाम पर खड़ी कर दी 100 करोड़ की कंपनी, 28 करोड़ से अधिक जीएसटी बकाया का खुलासा
आधार-पैन और हस्ताक्षरों के दुरुपयोग से फर्जी कंपनी बनाने का आरोप, जांच में जुटीं पुलिस और जीएसटी विभाग
करोड़ों के कारोबार का मालिक निकला पंक्चर बनाने वाला युवक, अधिकारियों के भी उड़े होश
गोरखपुर। जिले में जीएसटी फर्जीवाड़े का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने कर विभाग से लेकर स्थानीय प्रशासन तक को हैरान कर दिया है। आरोप है कि एक साधारण पंक्चर दुकानदार के नाम पर करीब 100 करोड़ रुपये के कारोबार वाली कंपनी खड़ी कर दी गई, जबकि संबंधित व्यक्ति को इसकी भनक तक नहीं थी। मामले में 28 करोड़ रुपये से अधिक के जीएसटी बकाये का भी खुलासा हुआ है।
बहन की शादी के बहाने लिए गए थे आधार और पैन कार्ड
पीड़ित राज प्रजापति ने आरोप लगाया है कि उसके आधार कार्ड, पैन कार्ड, हस्ताक्षर और अन्य पहचान संबंधी दस्तावेजों का दुरुपयोग कर उसके नाम से फर्जी कंपनी का पंजीकरण करा दिया गया। पीड़ित के अनुसार, कुछ समय पहले बहन की शादी के नाम पर उससे आवश्यक दस्तावेज लिए गए थे। इसी दौरान कथित रूप से उसके पहचान पत्रों और हस्ताक्षरों की प्रतियां हासिल कर ली गईं और बाद में उनका इस्तेमाल कंपनी बनाने में किया गया।
बैंक खाता खोलकर किए गए करोड़ों के लेन-देन
आरोप है कि कंपनी के संचालन के लिए उसके नाम पर बैंक खाता भी खुलवाया गया और उसके जरिए बड़े पैमाने पर वित्तीय लेन-देन किए गए। जब जीएसटी विभाग की जांच में करोड़ों रुपये के कर बकाये का मामला सामने आया तो दस्तावेजों की गहन जांच शुरू की गई।
जांच के दौरान जब अधिकारी संबंधित पते और व्यक्ति तक पहुंचे तो वास्तविकता देखकर हैरान रह गए। जिस व्यक्ति के नाम पर 100 करोड़ रुपये के कारोबार का रिकॉर्ड दर्ज था, वह वास्तव में एक छोटी सी पंक्चर की दुकान चलाकर अपना जीवन-यापन कर रहा था।
पीड़ित ने थाने में दर्ज कराई शिकायत
मामला सामने आने के बाद राज प्रजापति ने एम्स थाना क्षेत्र में शिकायत दर्ज कराते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में फर्जी कंपनी बनाने, दस्तावेजों के दुरुपयोग तथा बैंकिंग धोखाधड़ी की आशंका जताई गई है। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है।
कई लोगों के दस्तावेजों के दुरुपयोग की संभावना
सूत्रों के अनुसार प्रारंभिक जांच में मामला किसी संगठित फर्जीवाड़े और शेल कंपनियों के नेटवर्क से जुड़ा प्रतीत हो रहा है। आशंका जताई जा रही है कि ऐसे गिरोह लोगों के पहचान संबंधी दस्तावेजों का दुरुपयोग कर फर्जी कंपनियां बनाते हैं और उनके माध्यम से कर चोरी तथा अन्य वित्तीय अनियमितताओं को अंजाम देते हैं।
जांच पूरी होने के बाद होगा बड़े खुलासे का दावा
फिलहाल पुलिस, जीएसटी विभाग और संबंधित एजेंसियां पूरे मामले की जांच में जुटी हैं तथा नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास कर रही हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस करोड़ों रुपये के कथित घोटाले के पीछे कौन लोग शामिल हैं और कितने अन्य लोगों के दस्तावेजों का इसी प्रकार दुरुपयोग किया गया है।
