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गोरखपुर

डीडीयू में पहली बार होंगे ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ की नियुक्तियां

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सांसद रवि किशन समेत तीन नामों पर चर्चा, कार्यपरिषद की बैठक के बाद होगा अंतिम निर्णय

गोरखपुर।दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (डीडीयू) उच्च शिक्षा में व्यावहारिक अनुभव को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। विश्वविद्यालय में पहली बार ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ योजना के तहत गैर-अकादमिक क्षेत्र के विशेषज्ञों को मानद प्रोफेसर नियुक्त करने की तैयारी है। इस संबंध में औपचारिक घोषणा 30 जून को प्रस्तावित कार्यपरिषद की बैठक के बाद किए जाने की संभावना है।

इन नामों पर चल रही चर्चा

विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस योजना के तहत संभावित उम्मीदवारों के साक्षात्कार पूरे कर लिए हैं। चर्चा में गोरखपुर के सांसद रवि किशन शुक्ला, उद्योगपति चंद्र प्रकाश अग्रवाल और व्यवसायी अतुल सर्राफ के नाम प्रमुख रूप से सामने आए हैं। हालांकि अंतिम निर्णय कार्यपरिषद की स्वीकृति के बाद ही घोषित किया जाएगा।

मानद होंगे सभी पद

विश्वविद्यालय के अनुसार, ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ के तहत होने वाली सभी नियुक्तियां मानद (ऑनरेरी) होंगी। इनका उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवी विशेषज्ञों को छात्रों के साथ जोड़कर उन्हें व्यावहारिक ज्ञान और उद्योग जगत का अनुभव उपलब्ध कराना है।

क्या है ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ योजना?

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने वर्ष 2020 में उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ योजना लागू की थी। इसके तहत उद्योग, कला, व्यापार, प्रशासन, खेल और अन्य क्षेत्रों के अनुभवी विशेषज्ञों को बिना पीएचडी या नेट (NET) की अनिवार्यता के विश्वविद्यालयों में अध्यापन और मार्गदर्शन का अवसर दिया जा सकता है।

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व्यावहारिक शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा

विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इस पहल से छात्रों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों का व्यावहारिक अनुभव भी मिलेगा, जिससे उनकी रोजगार क्षमता और पेशेवर कौशल को मजबूती मिलेगी।

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