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वाराणसी

टीबी के छिपे हुए रोगियों को खोजने में एसीएफ़ अभियान की अहम भूमिका– सीएमओ

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जनपद में 23 नवंबर से 5 दिसम्बर तक चला सक्रिय टीबी रोगी खोज अभियान

दस दिवसीय अभियान में खोजे गए 98 टीबी रोगी, सभी का उपचार शुरू

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निजी क्षेत्र के लिए विशेष एसीएफ़ अभियान 7 से 14 दिसम्बर तक संचालित

वाराणसी: केस – 1 शिवपुर सेंट्रल जेल कुंज बिहारी कॉलोनी निवासी 54 वर्षीय रामाधार (परिवर्तित नाम) के घर जब स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची तो पता चला कि वह डेढ़ साल पहले टीबी की दवा खा चुके हैं। उपचार पूरा होने पर ठीक हो चुके थे, लेकिन धूम्रपान व मदिरापान करने की वजह से उनके अंदर पुनः टीबी का संक्रमण पनपने लगा। कुछ दिन पहले जब उनका बलगम जांच के लिए भेजा गया तो टीबी की पुष्टि हुई, जिसका उपचार छह माह तक चलेगा। सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइजर (एसटीएस) मदन मोहन ने रामाधार को सम्पूर्ण उपचार व किसी प्रकार का नशा न करने के लिए प्रोत्साहित किया। आर्थिक रूप से कमजोर रामाधार मजदूरी कर अपना परिवार चलाते हैं। वह बताते हैं कि घर में किसी और सदस्य को टीबी नहीं है। अब वह सम्पूर्ण उपचार कराएंगे और नशे से भी दूर रहेंगे। केस – 2 शिवपुर क्षेत्र भरलाई निवासी 15 वर्षीय मुस्कान (परिवर्तित नाम) बहुत दिन से खांसी से परेशान थी तो उन्होंने सामान्य खाँसी समझ कर झोलाछाप डॉक्टर से उपचार कराया, लेकिन कोई फायदा नहीं मिला। सक्रिय टीबी रोगी खोज अभियान के दौरान उनके घर जब स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची तो टीबी के लक्षण मिलने पर उनकी बलगम की जांच की गई, जिसमें वह पॉज़िटिव पाई गईं। टीम ने उन्हें छह माह तक सम्पूर्ण उपचार करने के लिए प्रेरित किया। वह बताती हैं कि उनके घर में किसी को टीबी नहीं है, लेकिन टीबी होने पर वह एक भी दिन दवा खाना नहीं भूलेंगी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ संदीप चौधरी ने कहा कि ऐसे ही टीबी लक्षण युक्त छिपे हुए रोगियों को खोजने में सक्रिय टीबी रोगी खोज अभियान ने अहम भूमिका निभायी । यह अभियान जनपद में 23 नवंबर से पाँच दिसम्बर तक संचालित किया गया। सीएमओ ने जिला क्षय रोग इकाई के समस्त कर्मचारियों को निर्देश दिया कि वह जल्द से जल्द सभी उपचारधीन टीबी रोगियों की बैंक डिटेल को प्राप्त करें, जिससे उन्हें निक्षय पोषण योजना का लाभ मिल सके। निजी क्षेत्र के चिकित्सकों, मेडिकल स्टोर आदि को ज्यादा से ज्यादा टीबी मरीजों के नोटिफिकेशन के लिए प्रेरित करें। उन्होंने बताया कि क्षय रोग से संबन्धित सभी प्रकार की जांच, दवाइयाँ सभी सरकारी चिकित्सालयों में उपलब्ध हैं। जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डॉ पीयूष राय ने बताया कि वाराणसी की समस्त 23 टीबी यूनिट के अंतर्गत आबादी लगभग 40.97 लाख के सापेक्ष सक्रिय क्षय रोगी खोज अभियान में लक्षित 20 प्रतिशत यानि 6.68 लाख आबादी को कवर किया गया, जिसकी एसीएफ टीम के द्वारा घर-घर जाकर स्क्रीनिंग की गई। दस दिवसीय अभियान में टीम के द्वारा लक्ष्य के सापेक्ष करीब 6.42 लाख लोगों की स्क्रीनिंग की गई। इसमें 2223 व्यक्तियों में टीबी के संभावित लक्षण पाये गए। इसमें 2123 व्यक्तियों के सैंपल जांच के लिए भेजे गए, जिसमें 93 टीबी पॉज़िटिव पाये गए, जिसमें 55 व्यक्तियों की पहचान क्लीनिकल और रेडियोलॉजी द्वारा की गई। सभी 93 रोगियों का तत्काल नोटिफिकेशन करते हुये उपचार शुरू किया गया। इसके साथ ही इस वर्ष जनपद में जनवरी से अब तक 17,250 लक्ष्य के सापेक्ष 16,646 टीबी रोगी नोटिफ़ाई किए गए, जिसमें सरकारी क्षेत्र में 10,244 व निजी क्षेत्र में 6302 रोगियों को नोटिफ़ाई किया गया। डॉ पीयूष ने बताया कि निजी क्षेत्र के लिए विशेष सक्रिय टीबी रोगी खोज अभियान सात दिसम्बर से 14 दिसम्बर तक संचालित किया जा रहा है, जिसमें निजी क्षेत्र के आयुष व ऐलोपैथिक चिकित्सकों, मेडिकल स्टोर आदि से टीबी मरीजों के ज्यादा से ज्यादा नोटिफिकेशन करने के लिए अपील की गई है। उन्होंने बताया कि निक्षय पोषण योजना के तहत टीबी के नए मरीज को 500 रुपये प्रति माह अच्छे पोषण के लिए सरकार द्वारा दिये जा रहे हैं। निजी क्षेत्र में भी जिन टीबी मरीजों का इलाज चल रहा है, उन टीबी मरीजों को भी 500 रुपये सरकार द्वारा प्रदान किया जाना है।

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