गोरखपुर
जटेपुर की 5.242 हेक्टेयर जमीन पर विवाद गहराया
800 परिवारों पर बेदखली का खतरा
आबादी की जमीन पर वरासत दर्ज होने का आरोप, मोहल्लेवासियों ने डीएम से लगाई न्याय की गुहार
गोरखपुर। धर्मशाला बाजार के जटेपुर क्षेत्र में जमीन को लेकर विवाद अब गहराता जा रहा है। करीब 800 परिवारों ने आरोप लगाया है कि सुनियोजित तरीके से वरासत दर्ज कराकर वर्षों से बसी आबादी को हटाने की कोशिश की जा रही है। मामले को लेकर बड़ी संख्या में मोहल्लेवासी जिलाधिकारी दीपक मीणा के जनता दर्शन में पहुंचे और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराकर राहत दिलाने की मांग की। डीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं।
5.242 हेक्टेयर भूमि पर वरासत दर्ज करने पर उठे सवाल
मोहल्लेवासियों का आरोप है कि नगर मजिस्ट्रेट न्यायालय में वाद संख्या 2505/2023 के माध्यम से उन्हें हटाने का प्रयास किया गया था। हालांकि, 3 जुलाई 2026 के आदेश में न्यायालय ने प्रार्थियों के कब्जे को स्वीकार किया था। इसके बावजूद अब दूसरे माध्यमों से जमीन पर दावा मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।
लोगों का कहना है कि 28 अप्रैल 2026 को नायब तहसीलदार पिपराइच न्यायालय द्वारा खेवट खाता संख्या-1 की 5.242 हेक्टेयर भूमि पर विवादित परिस्थितियों में वरासत दर्ज कर दी गई। इसी वरासत को आधार बनाकर अब पूरी आबादी को हटाने की आशंका जताई जा रही है।
कई पीढ़ियों से रह रहे हैं लोग, देते हैं टैक्स और बिजली बिल
स्थानीय निवासियों ने बताया कि यह कोई खाली जमीन नहीं है, बल्कि वर्षों पुरानी आबादी है। यहां करीब 800 मकान बने हुए हैं, जिनमें कई पीढ़ियों से परिवार निवास कर रहे हैं। लोग नियमित रूप से हाउस टैक्स, जल कर और बिजली बिल का भुगतान करते आ रहे हैं।
मोहल्लेवासियों ने यह भी बताया कि इसी क्षेत्र में नगर निगम का पार्क, रैन बसेरा, मेयर कार्यालय और जीडीए के आवास भी स्थित हैं, जिससे क्षेत्र की आबादी और उपयोगिता स्पष्ट होती है।
जमींदारी उन्मूलन की जमीन होने का दावा
स्थानीय लोगों का कहना है कि जमींदारी उन्मूलन के दौरान 12.5 एकड़ से अधिक भूमि पर आबादी बसाई गई थी और जटेपुर की यह जमीन भी उसी श्रेणी में आती है। ऐसे में वर्तमान में की गई वरासत को उन्होंने संदिग्ध बताते हुए कहा कि इससे सैकड़ों परिवारों के घरों पर संकट खड़ा हो गया है।
डीएम ने दिए जांच के आदेश, कार्रवाई का भरोसा
जनता दर्शन में पहुंचे लोगों ने जिलाधिकारी से विवादित वरासत आदेश की जांच कर उसे निरस्त करने तथा पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की। उन्होंने आशंका जताई कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाया गया तो बड़ी संख्या में परिवार बेघर हो सकते हैं।
जिलाधिकारी दीपक मीणा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को निष्पक्ष जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा और नियमानुसार ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल जटेपुर क्षेत्र में इस मामले को लेकर लोगों में चिंता और आक्रोश का माहौल है। स्थानीय लोग अब प्रशासन की जांच रिपोर्ट और फैसले का इंतजार कर रहे हैं।
