गाजीपुर
चकेरी धाम को पर्यटन केंद्र बनाने की मांग, सुविधाओं का अभाव बरकरार
देवकली (गाजीपुर) जयदेश। देवकली ब्लॉक के दक्षिणी छोर पर गंगा तट स्थित चकेरी धाम ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के बावजूद उपेक्षा का शिकार बना हुआ है। धाम परिसर में स्थापित मां दुर्गा मंदिर पर प्रतिवर्ष नवरात्रि के दौरान भारी भीड़ उमड़ती है, जबकि रामनवमी और पूर्णिमा के अवसर पर विशाल मेले का आयोजन होता है। इसके साथ ही प्रत्येक स्नान पर्व पर गंगा स्नान के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। गाजीपुर के अलावा गंगा पार स्थित चंदौली और वाराणसी जनपद सहित दूर-दराज के क्षेत्रों से भी भक्त मां दुर्गा के दर्शन के लिए आते हैं। मान्यता है कि यहां दर्शन-पूजन कर मत्था टेकने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

धाम के समीप गंगा किनारे एक ऐसा पोखरा स्थित है, जिसमें गंगा का जल निरंतर चक्र बनाकर घूमता रहता है। इसमें डाली गई किसी भी वस्तु का पता नहीं चल पाता है। इसकी गहराई नापने के कई प्रयास किए गए, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार महाभारत काल में भीम और कीचक का युद्ध भी इसी स्थल पर हुआ था। गंगा तट पर स्थित होने के कारण वर्षा ऋतु में बाढ़ का पानी मंदिर के चारों ओर घूमता रहता है, जिससे इसके गंगा में विलीन होने का खतरा बना रहता है।
करीब तीन दशक पूर्व चकेरी धाम के महंत संत त्रिवेणी दास जी महाराज ने लंबे-चौड़े ऊंचे चबूतरे पर मंदिर का जीर्णोद्धार कराते हुए विशाल निर्माण कराया था। जयपुर, राजस्थान से नौ कुंतल वजनी संगमरमर की मां दुर्गा की भव्य प्रतिमा स्थापित कर महायज्ञ का आयोजन भी कराया गया था। साथ ही नागरिकों के सहयोग से धाम के चारों ओर चहारदीवारी और सीढ़ियों का निर्माण कराया गया, लेकिन बाढ़ के दौरान सैकड़ों फीट लंबी चहारदीवारी ध्वस्त हो गई। आर्थिक संसाधनों के अभाव में आज तक इसका पुनर्निर्माण नहीं हो सका है, जिससे हर वर्ष बाढ़ के समय मंदिर पर खतरा मंडराता रहता है। घाट की सीढ़ियां भी टूटकर क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। पुरातत्व विभाग और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी के चलते यह धाम उपेक्षित बना हुआ है और यहां समय-समय पर दुर्घटनाएं भी होती रहती हैं।

महंत संत त्रिवेणी दास जी महाराज के अनुसार गंगा तट पर स्थित मंदिर और विस्तृत बगीचे के कारण इस धाम का विशेष महत्व है, जहां पहुंचने पर लोगों को शांति और सुकून का अनुभव होता है। उन्होंने कहा कि इसे पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किए जाने की व्यापक संभावनाएं हैं। धाम परिसर में प्रतिवर्ष कई शादी-विवाह भी संपन्न होते हैं, लेकिन यहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। कई एकड़ में फैले बगीचे के साथ मां दुर्गा मंदिर, प्राचीन श्रीराम, मां सीता, भक्त हनुमान और चारों भाइयों की भव्य मूर्तियां, शिव मंदिर सहित अन्य धार्मिक स्थल यहां मौजूद हैं। क्षेत्रीय नागरिकों द्वारा दशकों से इसे पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक पुरातत्व विभाग की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई है, जिससे यह अमूल्य सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर नष्ट होने के कगार पर पहुंच गई है।
