Connect with us

गाजीपुर

चकेरी धाम को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की जरूरत : संत त्रिवेणी दास महाराज

Published

on

Loading...
Loading...

गंगा तट पर स्थित ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहर उपेक्षा का शिकार, संरक्षण की उठी मांग

नवरात्रि, रामनवमी व स्नान पर्वों पर उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़, सुविधाओं के अभाव में श्रद्धालु परेशान

देवकली (गाजीपुर)। देवकली ब्लॉक के दक्षिणी छोर पर गंगा तट पर स्थित ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थल चकेरी धाम आज भी विकास की राह देख रहा है। धार्मिक महत्व और प्राकृतिक सुंदरता से परिपूर्ण होने के बावजूद यह धाम उपेक्षा का शिकार है। क्षेत्रीय लोगों ने इसे पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की मांग उठाई है।

चकेरी धाम स्थित मां दुर्गा मंदिर में प्रतिवर्ष नवरात्रि के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। रामनवमी और पूर्णिमा के अवसर पर यहां विशाल मेले का आयोजन होता है। इसके अलावा प्रत्येक स्नान पर्व पर गंगा स्नान के लिए गाजीपुर सहित चंदौली, वाराणसी और दूर-दराज क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मान्यता है कि मां दुर्गा के दरबार में सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

महाभारत काल से जुड़ी है मान्यता

चकेरी धाम परिसर में स्थित एक प्राचीन पोखरे का भी विशेष महत्व है। स्थानीय मान्यता के अनुसार इसमें गंगा का जल हमेशा चक्कर लगाता रहता है और इसमें डाली गई वस्तु का पता नहीं चलता। कई बार इसकी गहराई नापने का प्रयास किया गया, लेकिन सफलता नहीं मिली। लोगों का मानना है कि महाभारत काल में भीम और कीचक का युद्ध इसी स्थान पर हुआ था।

Advertisement

गंगा तट पर स्थित होने के कारण बरसात के दिनों में मंदिर और परिसर को बाढ़ के खतरे का सामना करना पड़ता है। गंगा की तेज धारा से मंदिर की सुरक्षा को लेकर हमेशा चिंता बनी रहती है।

संत त्रिवेणी दास महाराज ने कराया था भव्य निर्माण

चकेरी धाम उस समय विशेष चर्चा में आया था, जब करीब तीन दशक पूर्व धाम के महंत संत त्रिवेणी दास महाराज ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था। उन्होंने ऊंचे और विशाल चबूतरे पर भव्य मंदिर का निर्माण कराया तथा जयपुर राजस्थान से करीब 9 कुंतल वजन की विशाल संगमरमर की मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर महायज्ञ कराया था।

इसके साथ ही नागरिकों के सहयोग से धाम के चारों ओर चहारदीवारी और सीढ़ियों का निर्माण भी कराया गया था, लेकिन बाढ़ के कारण चहारदीवारी का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया।

धन के अभाव में नहीं हो सका पुनर्निर्माण

महंत संत त्रिवेणी दास महाराज ने बताया कि आर्थिक संसाधनों के अभाव में आज तक चहारदीवारी का पुनर्निर्माण नहीं हो सका है। हर वर्ष बाढ़ का पानी टकराने से मंदिर के अस्तित्व पर खतरा मंडराता रहता है। वहीं घाट की सीढ़ियां भी टूटकर बिखर रही हैं।

उन्होंने कहा कि पुरातत्व विभाग और जनप्रतिनिधियों का ध्यान इस ऐतिहासिक धरोहर की ओर नहीं गया, जिससे यह स्थल विकास से वंचित है। यहां प्रतिवर्ष दुर्घटनाएं भी होती रहती हैं।

Advertisement

पर्यटन की दृष्टि से अपार संभावनाएं

संत त्रिवेणी दास महाराज ने कहा कि गंगा किनारे स्थित यह धाम, विशाल बगीचा, प्राचीन मंदिरों और प्राकृतिक वातावरण के कारण पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किए जाने की अपार संभावनाएं रखता है। परिसर में मां दुर्गा मंदिर के साथ भगवान श्रीराम, माता सीता, भक्त हनुमान और चारों भाइयों की भव्य प्रतिमाएं, शिव मंदिर सहित कई धार्मिक स्थल मौजूद हैं।

कई एकड़ में फैले बगीचे और शांत वातावरण के कारण यहां आने वाले श्रद्धालुओं को सुख और शांति का अनुभव होता है। धाम परिसर में प्रतिवर्ष कई शादी-विवाह कार्यक्रम भी आयोजित होते हैं, लेकिन मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना हुआ है।

क्षेत्रीय नागरिकों ने मांग की है कि चकेरी धाम को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित कर यहां सुरक्षा, घाट निर्माण, प्रकाश व्यवस्था और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि यह ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहर आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रह सके।

Copyright © 2024 Jaidesh News. Created By Hoodaa

You cannot copy content of this page